फेस्टिवल में आज वेस्टर्न ग्रुप सॉंग, क्लासिकल इंस्ट्रूमेंटल (शास्त्रीय), नान परकशन, क्लासिकल इंस्ट्रूमेंटल परकशन और डिबेट खासे आकर्षण का केंद्र रहे। स्टूडेंट्स ने स्टेज पर जो पेशकारी दी उससे साबित हो गया कि वह नए और पुरानी दोनों ही संगीत की विधाओं में पारंगत हैं।
इसी तरह से इस मुकाबले में रंगोली खास आकर्षण का केंद्र रही। गुरु नानक आडिटोरियम में आर्किटेक्चर विभाग के स्टूडेंट्स ने रंगोली और कार्टून के जरिए धार्मिक, सामाजिक, पर्यावरणीय, आर्थिक व मानवीय संवेदनाअाें को उकेर कर वाहवाही लूटी। इनमें जो रंग इस्तेमाल किए गए उनको देख कर लगता था कि मानो कोई दक्ष कलाकार उनको आकार दे रहा हो। इनमें पंजाब व अन्य सूबों की कला-संस्कृति का अक्स नजर आ रहा था तो ग्लोबल वार्मिंग और इंसानी उपेक्षा के खतरों को भी बयां किया गया। दशमेश आडिटोरियम में ही जब नाटकों के मंचन की बारी आई तो दर्शक वाह-वाह किए बगैर नहीं रहे। नाटकों की कड़ी में पेश `जानेमन` नाटक में स्टूडेंट्स ने किन्नर (खुसरों) की जिंदगी के दुखद पहलुओं को चित्रित किया। महिंदर मोहे लिखित तथा डॉ. हरिकेश पंगाल निर्देशित इस नाटक ने भारतीय समाज में खुसरों की दयनीय दशा पर फोकस किया। नाटक में दिखाया गया कि वह किस तरीके से दूसरों की खुशी का हिस्सा बनते हैं लेकिन उनकी अपनी ही जिंदगी उदास, वीरान तथा उपहास भरी होती है। इसी तरह से फेस्टिवल के अन्य नाटक भी प्रेरणा और ज्ञानप्रद रहे। युवफोरिया के आर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी एवं स्टूडेंट वेलफेयर विभाग के डीन डॉ. हरदीप सिंह ने बताया कि आयोजन के चौथे दिन शनिवार को दशमेश आडिटोरियम में ग्रुप सांग (इंडियन), फोक/ट्राइबल डांस के मुकाबले होंगे।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2Q40syD
via
जीएनडीयू की फिजा में तैरा शास्त्रीय संगीत, जमीं पर नजर आया रंग का हुनर
Reviewed by Dibyendu
on
18:10
Rating:
No comments: