
शायद इन्सानियत और दया भावना से ही दुनिया चल रही है। इसकी मिसाल बने हुए हैं शहर के कुछ समाजसेवी जो नगर कौंसिल की ओर से किए जाने वाले कार्य खुद कर रहे हैं। शहर में लावारिस पशुओं की तादाद लगातार बढ़ रही है और हर दिन कोई ना कोई पशु किसी ना किसी हादसे का शिकार हो जाता है। रविवार को युवाओं की ओर से जहां एक बैल को पानी से निकाला गया वहीं रात के समय पानी के गड्ढे में फंसी गाय को बड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला। सोमवार रात भी सड़क पर पड़े एक बैल को युवाओं के द्वारा उठा कर गौशाला में छोड़ा गया। इन सभी पशुओं का डाॅक्टरी इलाज भी करवाया गया। भारी ठंड के कारण पानी में फंसे बैल और गाय को अगर न निकाला जाता तो वह मर जाते। इस संबंधी नीरज शर्मा, राहुल शर्मा, मुकुल राणा, उमेश शर्मा, शामल सूद, राणा का कहना है कि सरकार को इस समस्या की ओर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोग बीमार होने पर या बूजुर्ग हो जाने पर इन पशुओं को छोड़ देते हैं। उन्हें सोचना चाहिए कि जिन पशुओं का दूध बेचकर उनके परिवार का गुजारा होता है, उन पशुओं की उन्हें उम्र भर देखभाल करनी चाहिए ताकि वह दरबदर न हों।
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