फतेहगढ़ साहिब (स्वर्णजीत सिंह अश्क).देश में इस समय नागरिकता संसाेधन कानून अाैर एनअारसी काे लेकर जहां धर्म को लेकर तनाव का माहाैल बना हुअा है वहीं, फतेहगढ़ साहिब में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने आपसी भाईचारे की मिसाल पैदा की है। यहां मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एेतिहासिक लाल मस्जिद का परिसर सिखों के लिए खोल दिया है। यहां तीन दिन तक चलने वाले शहीदी जोड़-मेल के लिए लंगर का आयोजन किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक लाल मस्जिद के नाम से जानी जाने वाली यह मस्जिद मुगलकालीन समय की है। शेख अहमद फारुकी सिरहिंदी (1560-1623) के पोते सैफुद्दीन इसके उत्तराधिकारी थे, जिन्हें मुजादद अल्फ सानी भी कहा जाता है। मस्जिद परिसर के दरवाजे मुस्लिमों ने सिख समुदाय के लोगों के लिए खोल दिए है ताकि वह यहां रसोई तैयार कर श्रद्धालुओं को लंगर छकवाया जा सके। साल 2015 में इस मस्जिद का पुनर्निर्माण कराया गया था।
42 साल से लंगर में कर रहे हैं सेवा
रानवान गांव के रहने वाले बलवंत सिंह ने कहा कि मुस्लिम समुदाय ने लंगर तैयार करने के लिए अपनी जमीन की अनुमति दे दी है। हमारे बजुर्ग करीब 42 साल से यहां लंगर की सेवा कर रहे हैं। मस्जिद के तहखाने का इस्तेमाल भी हमारे खाद्य पदार्थों के भंडारण के लिए किया जा रहा है। दो गांवों के गुरुद्वारों ने मिलकर लंगर का आयोजन किया है और समुदाय के लोग रसोई घर की सेवाओं में भी हाथ बंटा रहे हैं। गांव राई माजरा के जसविंदर सिंह का कहना है कि मुस्लिम भाईचारे के लोग सभी मामलों में साथ देते हैं ।
सिखों की लड़ाई ज़ुल्म के खिलाफ थी न कि इस्लाम के खिलाफ
मस्जिद के साहमने बने माता गुजरी कॉलेज में पंजाबी के प्रोफेसर राशिद रशीद कहते हैं कि धर्म प्यार सिखाता है। सिखों की लड़ाई ज़ुल्म के खिलाफ थी न कि इस्लाम या मुस्लिम के खिलाफ। अगर सिख धर्म के बानी गुरु नानक देव जी की बात करो तो उनके सबसे करीब भाई मरदाना ही थे जो उनके साथ हर समय रहने वाले साथी थे।
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