Breaking News

test

मेवात की झूलती मीनार की मरम्मत में घटिया क्वालिटी की सामग्री का इस्तेमाल, 20 लाख रुपए का था बजट

चंडीगढ़ (मनोज कुमार).मेवात स्थित ऐतिहासिक शेख मुसा की दरगाह परिसर में बनी झूलती मीनार के संरक्षण और मरम्मत कार्य में घोटाला सामने आया है। कुछ समय पहले इसकी मरम्मत में खानापूर्ति की गई। जो सामग्री लगाई जानी थी, उसकी बजाए चूना-सीमेंट आदि लगाकर काम निपटा दिया गया।

मरम्मत के लिए 20 लाख रुपए का बजट तय किया गया था, लेकिन अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान पाया कि जो काम हुआ है, वह पांच लाख रुपए का भी नहीं लग रहा। इसलिए आर्कियोलॉजी एंड म्यूजियम डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेट्री अशोक खेमका ने इस मामले की पूरी रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेजी है।

साथ ही लिखा गया है कि भविष्य में हैरिटेज बिल्डिंग के संरक्षण और मरम्मत का पीडब्यूडी के जरिए जो काम कराया जाता है, वह इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चर हेरीटेज (आईएनटीएसीएच) दिल्ली के पैनल में शामिल कांट्रेक्टर्स से ही कराया जाए। चिट्‌ठी पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को भी भेजी गई है।

जिसमें कहा गया है कि वह उक्त दिशा-निर्देश एग्जीक्यूटिव इंजीनियर्स को भी दें ताकि हैरिटेज बिल्डिंगों का संरक्षण और मरम्मत का काम ठीक तरह से हो सके। सूत्रों का कहना है कि एक मामला सामने आने के बाद विभाग की ओर से अन्य हैरिटेज बिल्डिंगों के संरक्षण और मरम्मत के हुए कार्य भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। प्रदेश में 100 से ज्यादा हैरिटेज बिल्डिंग हैं, जिनके भी संरक्षण और मरम्मत का कार्य चलता रहता है।

पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को भेजी चिट्‌ठी

विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी की ओर से पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को भेजी गई चिट्‌ठी में आईएनटीएसीएच के पैनल में शामिल कांट्रेक्टर्स की लिस्ट, एड्रेस और नंबर तक भी भेजे हैं। इसमें दस कांट्रेक्टर्स के नाम शामिल हैं। साथ में हैरिटेज बिल्डिंग की मरम्मत में काम आने वाली सामग्री के रेट की लिस्ट भी संलग्न की है।

बता दें कि हैरिटेज बिल्डिंग की मरम्मत के लिए विशेष सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कुछ कैमिकल भी प्रयोग होते हैं। जिनसे पत्थरों की सफाई होती है। इसके अलावा इसके लिए कच्चा चूना, स्टील, यमुना की रेत, तारपीन का तेल, लिक्विड अमोनिया समेत कई विशेष सामग्री मरम्मत के लिए प्रयोग की जाती है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि मीनार की मरम्मत में यह सभी सामग्री इस्तेमाल नहीं हुई है।

ढाई साल पहले सरकार ने लिया था संरक्षण में
करीब दो-ढाई साल पहले ही हरियाणा पुरातत्व विभाग न इस दरगाह और मीनार को संरक्षण में लिया था। 14वीं शताब्दी में बनी इमारत का गुंबद मुगल और राजपूत स्टाइल की निर्माण कला का बेहतर नमूना है। ऐसा माना जाता है मोहम्मद फरीद के पौत्र शेख मुसा यहां शांति और अध्यात्म की खोज में आए थे। यह ढांचा उन्होंने ही बनवाया है। दरगाह के चारों ओर 12 गेट हैं। स्थानीय पत्थर में निर्मित मेहराब में चूने का उपयोग किया गया। यहां बनी मीनार एक रिदम में हिलती हैं। इसी वजह से इसे झूलती मीनार भी कहा जाता है। एक मीनार को हिलाने पर दूसरी भी झूलती है। इन्हें देखने को पहले हजारों लोग जाते थे।

मन को भाने वाला सुधार नहीं हुआ: मौलाना
दरगाह के मौलाना ईसा का कहना है कि कुछ समय पहले मीनार की मरम्मत हुई थी, लेकिन जिस प्रकार से होनी चाहिए, वह नहीं हो पाया। मीनार को देखने के लिए चंडीगढ़ से कुछ अधिकारी आए थे, उन्हें भी बताया था। सामग्री भी वह प्रयोग नहीं हुई जो होनी चाहिए थी। हालांकि मरम्मत के बाद मीनार में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन दिल को भाने वाली बात नहीं है।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
फाइल फोटो।


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/379sjD9
via
मेवात की झूलती मीनार की मरम्मत में घटिया क्वालिटी की सामग्री का इस्तेमाल, 20 लाख रुपए का था बजट मेवात की झूलती मीनार की मरम्मत में घटिया क्वालिटी की सामग्री का इस्तेमाल, 20 लाख रुपए का था बजट Reviewed by Dibyendu on 16:26 Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.