चंडीगढ़. साइबर मीडिया रिसर्च (सीएमआर) के सहयोग से स्मार्टफोन कंपनी ने ह्यूमन रिलेशन पर स्मार्टफोन के प्रभाव को जानने के लिए किए गए एक सर्वे के नतीजों की घोषणा की है। इस सर्वे में स्वाभाविक स्मार्टफोन के उपयोग के विभिन्न आयामों का मूल्यांकन और रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए स्मार्टफोन से जुड़े उन ट्रेंड्स, पैटर्न्स, आदतों को उजागर किया गया है, जो स्मार्टफोन उपयोगकर्ता के कार्यों, मूड और वरीयताओं को प्रभावित करती है।
सर्वे में, यह पाया गया कि 75 फीसदी यूजर्स के पास उनकी किशोरावस्था में भी स्मार्टफोन रहा है और उनमें से 41 फीसदी मानते हैं कि वे हाई स्कूल से पास होने के पहले ही फोन के आदी हो चुके थे। स्मार्टफोन के फायदों और इनकी लत को गहराई से जानने के लिए यह सर्वे किया गया है।
सर्वे में संबंधों पर उनके प्रभाव की यह रिपोर्ट विभिन्न आयु-समूहों के लोगों से बात कर तैयार की गई है, जिसमें 18 से 45 वर्ष की आयु के युवा, कामकाजी पेशेवर और हाउस वाइफ शामिल हैं। इस सर्वे में शामिल लोगाें की कुल संख्या 2000 थी, जिनमें से 36 फीसदी महिलाएं और 64 फीसदी पुरुष थे।
सर्वे में शामिल स्मार्टफोन कंपनी के डायरेक्टर निपुन मार्या कहते हैं कि स्मार्टफोन आज हमारे जीवन के हर पक्ष से जुड़ा है। यह दोस्तों, परिवार, मनोरंजन, बाहर खाने, यात्रा करने या मनोरंजन तक हमारी हर जरूरत के साथ जुड़ रहा है।
बोर्न इन द नेट जेनरेशन जब डिजिटल नेटिव के रूप में विकसित होती है, तब समाज में एक मूलभूत परिवर्तन होता है, जो रिश्तों, बातचीत और मानवीय भावनाओं के आदान-प्रदान को फिर से परिभाषित करता है। कस्टमर की भलाई में विश्वास करने वाले एक ब्रांड के रूप में हमने एक बहुत ही प्रासंगिक मुद्दे पर यह सर्वे किया है, जिस मुद्दे पर हमें सामूहिक रूप से चर्चा करनी चाहिए।
सर्वे के अनुसार औसतन हर भारतीय फोन पर अपने जागने के समय का एक तिहाई वक्त खर्च करता है, जो एक वर्ष में 1800 घंटे तक होता है। सिर्फ 30 फीसदी लोग महीने में कई बार अपने परिवार और प्रियजनों से मिलते हैं। स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले 3 में से 1 व्यक्ति को लगता है कि वे अपना फोन देखे बिना दोस्तों और परिवार के साथ 5 मिनट भी बातचीत नहीं कर सकते।
73 फीसदी लोगों का मानना है कि यदि स्मार्टफोन का उपयोग वर्तमान दर पर जारी रहता है या इससे अधिक बढ़ता है, तो यह इंसान के मानसिक या शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है तथा 5 में से 3 लोग कहते हैं कि मोबाइल फोन से अलग जीवन होना महत्वपूर्ण है और इससे उन्हें खुशहाल जीवन जीने में मदद मिल सकती है।
स्मार्टफोन, टैबलेट से होने वाले नुकसान: बच्चों को जितना संभव हो स्मार्टफोन से दूर रखना चाहिए। दरअसल होता यह है कि पहले माता-पिता ही लाड़-प्यार में बच्चों को स्मार्टफोन या टैबलेट अथवा आईपैड आदि दे देते हैं और फिर बाद में उसके दुष्परिणाम भुगतते हैं।
स्वभाव में आता है परिवर्तन : ज्यादातर बच्चे जिनको स्मार्टफोन की लत लग चुकी है अगर आप उनकी तुलना उन बच्चों से करेंगे जोकि स्मार्टफोन से दूर हैं तो पाएंगे कि स्मार्टफोन उपयोग करने वाले बच्चे सिर्फ वर्चुअल वर्ल्ड में जी रहे हैं और घर वालों से उन्हें कोई मतलब नहीं है। साथ ही उनका स्वभाव भी चिड़चिड़ा हो चुका होता है। अगर आप उन्हें थोड़ी देर के लिए भी स्मार्टफोन से दूर करेंगे तो वह गुस्से में आ जाएंगे या फिर चिल्लाना शुरू कर देंगे।
याददाशत पर विपरीत असर : पहले लोग एक दूसरे का फोन नंबर बड़ी आसानी से याद कर लेते थे। लेकिन आज जोड़-घटाव के लिए उन्हें कैलकुलेटर पर निर्भर होना पड़ रहा है। लेकिन अब सब कुछ स्मार्टफोन करता है और बच्चों को अपना दिमाग लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
उम्र से पहले ही पता लग जाता है सब कुछ: स्मार्टफोन में आप तरह तरह के एप डाउनलोड कर सकते हैं साथ ही यू ट्यूब पर जो भी वीडियो चाहे देख सकते हैं और इंटरनेट पर हर तरह की सामग्री उपलब्ध है। ऐसे में बच्चों को जो चीजें एक उम्र में जाननी चाहिए वह उन्हें कम उम्र में ही पता लगने लगती हैं जिसका उनके दिमाग पर असर होता है।
बुक्स पढ़ने की आदत छूटी: सबसे बड़ा नुकसान तो यह होता है कि बच्चे पूरी तरह स्मार्टफोन पर निर्भर हो जाते हैं। यदि बच्चा स्मार्टफोन का उपयोग अपनी पढ़ाई के लिए भी कर रहा है तो भी नुकसान हो रहा है। जिस सवाल का जवाब खोजने के लिए उसे किताब का पाठ पढ़ना चाहिए या फिर जिस शब्द का अर्थ जानने के लिए डिक्शनरी के पन्नों को पलटना चाहिए वह काम उसका झट से गूगल पर हो जाता है इसलिए बच्चों ने बुक्स पढ़ना कम कर दिया है।
पर्याप्त नींद नहीं: बच्चों को पर्याप्त नींद लेना जरूरी है लेकिन स्मार्टफोन की लत लग जाये तो बच्चे माता-पिता से छिप कर रात को स्मार्टफोन पर गेम खेलते रहते हैं या फिर कोई मूवी आदि देखते हैं जिससे उनके सोने के समय में तो कटौती होती ही है साथ ही आंखों को भी नुकसान होता है।
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