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144 साल में पहली बार दिखी तबले की ताल व सितार के तारों की गूंज के साथ कत्थक की झलक

जालंधर. जालंधर में श्रीदेवी तालाब मंदिर के प्रांगण में आयोजित 144वें श्री बाबा हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन की दूसरी रात उस वक्त ऐतिहासिक बन गई, जब यहां शास्त्रीय संगीत के साथ शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति पहली बार देखने को मिली। शनिवार रात को तबले की ताल और सितार के तारों पर गूंज रहे राग पर शीतल कोलवालकर ने शास्त्रीय नृत्य कत्थक की बेहतरीन प्रस्तुति दी। कत्थक की प्रस्तुति देख पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा।

सभा में कत्थक की प्रस्तुति देखने के लिए दूर-दूर से संगीत प्रेमी इकट्ठे हुए थे। शीतल कोलवालकर जैसे ही स्टेज पर कथक की प्रस्तुति देने के लिए आई दर्शकों ने कड़ी ठंड में भी तालियों के साथ उनका स्वागत किया। उत्तर भारत के सबसे सबसे पुरानी विधा में वैदिक संस्कृति की झलक को लपेटे हुए शीतल के नृत्य ने सम्मेलन में नया अध्याय जोड़ दिया।

श्यामा भट्टे की शिष्या शीतल विभिन्न स्थानों पर अपनी प्रस्तुति दे चुकी हैं। उनका कत्थक लोगों का दिल जीत लेता है, इसका उदाहरण आज सभी ने हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन में देखा। जयपुर व लखनऊ घराने की परंपरा को शीलत ने मंच पर प्रस्तुत किया। तबले पर विजय घाटे, सितार पर शाकिर खान, वोकल पर सुरंजन खान डालकर और हारमोनियम पर मिलिंद कुलकर्णी ने शीतल कालवालकर के साथ संगत की। सम्मेलन में पहली बार कत्थक को लेकर दर्शक पहले से ही काफी उत्साहित थे। उनका उत्साह उस समय कई गुना बढ़ गया, जब उम्मीदों पर खरी उतरकर शीतल ने पूरे पंडाल में संगीत के साथ शास्त्रीय नृत्य का जादू बिखेरा।



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श्यामा भट्टे की कत्थक कलाकार शिष्या शीतल कोलवालकर।
कत्थक की प्रस्तुति देखने के लिए दूर-दूर से संगीत प्रेमी इकट्ठे हुए थे श्रीदेवी तालाब में।
हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन के मंच पर कत्थक की प्रसतुति देतीं शीतल कोलवालकर।


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144 साल में पहली बार दिखी तबले की ताल व सितार के तारों की गूंज के साथ कत्थक की झलक 144 साल में पहली बार दिखी तबले की ताल व सितार के तारों की गूंज के साथ कत्थक की झलक Reviewed by Dibyendu on 06:10 Rating: 5

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