शिमला.घग्घर नदी काे दूषित हाेने से बचाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अधिकारियों काे एक्शन रिपोर्ट के साथ दिल्ली तलब किया है। प्राधिकरण जानना चाहता है कि इस महत्वपूर्ण नदी काे दूषित हाेने से बचाने के लिए राज्य सरकार की ओर से अभी तक क्या क्या कदम उठाए गए है।
एनजीटी ने अधिकारियों काे पूरे रिकॉर्ड के साथ दिल्ली बुलाया है। 17 जनवरी काे इस केस की सुनवाई रखी गई है। पांच राज्यों में बहने वाली इस नदी के पानी काे दूषित हाेने से बचाने के लिए एनजीटी काफी गंभीर है। प्रदेश में मारकंडा और कौशल्या नदी का पानी घग्घर नदी में मिल कर इसे दूषित कर रहा है। प्रदेश की सात दूषित नदियाें में मारकंडा भी एक दूषित नदियाें है, इसका पानी घग्घर में मिल कर इसे दूषित बना रहा है।
पूरे रिकॉर्ड के साथ दिल्ली जाएंगे अफसर
एनजीटी के समक्ष पेश हाेने से पहले एसीएस पर्यावरण आरडी धीमान अधिकारियों के साथ पहले समीक्षा बैठक करेंगे। इसमें संबंधित विभागों प्रदूषण नियंत्रण बाेर्ड, उद्याेग विभाग, आईपीएच विभाग और शहरी विकास विभाग के पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे। इसमें अधिकारियों से मारकंडा और कौशल्या नदी काे दूषित हाेने से बचाने के लिए किए गए काम की फीड बैक लेंगे। इसी आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट काे आगे एनजीटी काे साैंपा जाएगा। रिपाेर्ट के आधार पर ही एनजीटी अपना अगला फैसला सुनाएगी।
जारी किए साढ़े सात कराेड़ रु. ताकि नदियां न हों प्रदूषित
मारकंडा और कौशल्या नदी काे प्रदूषित हाेने से बचाने के लिए सरकार ने साढ़े सात कराेड़ जारी किए हैं। इस राशि से परवाणु और कालाअंब में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और उद्योगों से निकलने वाले गंदे पानी काे ट्रीट करने वाले प्लांट स्थापित होंगे। प्रदूषण नियंत्रण बाेर्ड के सदस्य सचिव आदित्य नेगी ने बताया कि दोनों नदियों काे दूषित हाेने से बचाने के लिए यहां पर एसटीपी और ईटीपी शीघ्र स्थापित किए जाएंगे।
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