जालंधर के एयर वाइस मार्शल सर्वजीत होठी ने 40 फाइटर पायलट ट्रेंड किए, 1350 घंटे से ज्यादा खुद उड़ाया मिग-27 और मिग-23
जालंधर (विकास शर्मा).मिग-23 और मिग-27 को 1350 से ज्यादा घंटे तक उड़ाने का अनुभव रखने वाले पूर्व एयर वाइस मार्शल सर्वजीत होठी के लिए शुक्रवार का दिन सबसे खास था। जालंधर के सर्वजीत होठी देश के ऐसे कुछेक अफसराें में से हैं जिन्हें मिग-23 और मिग-27 उड़ाने के साथ-साथ इनके इंस्ट्रक्टर हाेने का भी गाैरव हासिल है। जाेधपुर में मिग-27 काे अंतिम बार उड़ाने वाले वेस्टर्न कमांड के कमांडर एयर मार्शल बी सुरेश काे भी सर्वजीत हाेठी ने ट्रेंड कर पहली बार मिग-27 की साेलाे फ्लाइट के लिए भेजा था। मिग-27 में अंतिम बार उड़ान भरने से पहले बी सुरेश खास ताैर पर सर्वजीत हाेठी से मिलकर फाइटर प्लेन में सवार हुए। पूर्व एयर वाइस मार्शल सर्वजीत हाेठी ने मिग-23 अाैर मिग-27 उड़ाने के बाद 40 फाइटर पायलट काे ट्रेनिंग दी। साल 2007 में एयरफाेर्स से रिटायरमेंट के बाद हाेठी चार साल तक बाेइंग के कैप्टन रहे।
करगिल युद्ध के दाैरान मिग-27 से सबसे ज्यादा बमबारी
करगिल युद्ध के दौरान 3 स्कवाड्रन के कमांडिंग अफसर रहे होठी ने बताया कि दुनियाभर में मिग-27 जैसा सिंगल इंजन पावरफुल फाइटर प्लेन दूसरा नहीं था। अपने मिशन के दाैरान हवा में जरूरत के अनुसार मूवमेंट लेने की जाे क्षमता इस फाइटर प्लेन में थी वाे अन्य किसी सिंगल इंजन फाइटर प्लेन में नहीं थी। स्विंग विंग से इसकी स्पीड अाॅन एयर कम या ज्यादा की जा सकती थी। स्पीड कम करने से किसी भी लक्ष्य पर मिग-27 सटीक फायर कर सकता था। हम लाेगाें ने इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया। करगिल युद्ध के दाैरान सबसे ज्यादा बमबारी मिग-27 से की गई। एयरफाेर्स से रिटायरमेंट के बद हाेठी ने एयर इंडिया में भी सेवाएं दी थीं।
बहादुर था मिग-27 का देसी नाम, भारत में हुआ था निर्माण
मूल रूप सोवियत संघ में बना मिग-27 तीन दशक तक भारतीय एयर फाेर्स का हिस्सा रहा। 38 साल पुराना मिग-27 एेसा बड़ा फाइटर प्लेन था जिसका भारत में भी निर्माण हुअा। निर्माण और डिजाइन का लाइसेंस मिलने पर भारत में भी इस विमान काे बनाया गया अाैर इसका नाम बहादुर रखा गया था। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने मिग-27 बनाए थे। 86 विमानाें काे अपग्रेड कर भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। अपग्रेड कर इस फाइटर प्लेन में आधुनिक सिस्टम लगाए गए थे। कंप्यूटर की मदद से अलग-अलग हथियारों को सटीक दागने में कामयाबी मिलती थी। मिग-27 चार हजार किलोग्राम तक वेपन कैरी करने की कैपेसिटी रखता था।
फाइटर प्लेन से बोइंग तक का सफर
पूर्व एयर वाइस मार्शल सर्वजीत होठी ने बताया कि 1969 में एयरफोर्स का हिस्सा बना और अक्टूबर 2007 के बाद एयर इंडिया का। पहले जहां फाइटर प्लेन में होता था, फिर बोइंग 737 में बतौर कैप्टन दुनिया में घूमने लगा।
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