ऊना.हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर गांव पुरली कक्कड़ में जन्में 49 वर्षीय वीरेंद्र शर्मा इस वर्ष बीसीसीआई की ओर से आईसीसी अंपायर्स पैनल के लिए चयनित होने वाले इकलौते अंपायर हैं। वीरेंद्र शर्मा इस मुकाम पर पहुंचने वाले प्रदेश के पहले व वर्तमान देश के शमशुद्दीन, अनिल चौधरी व नितिन मेनन के पश्चात चौथे अंपायर बन गए है।
वीरेंद्र शर्मा ने अपना क्रिकेट करियर हमीरपुर जिला से बतौर अंडर-17 खिलाड़ी के रूप में शुरू किया था तत्पश्चात अंडर-19 खेलते हए वर्ष 1991से 50 के करीब रणजी मैचों में हिमाचल का प्रतिनिधित्व किया और वहीं वर्ष 2001से दो वर्षों तक हिमाचल की रणजी टीम के कप्तान भी रहे।
2007 में एचपीसीए के प्रदेश स्तरीय अंपायर पैनल में पर्दापण किया तब से लेकर आईसीसी के पैनल में चयनित होने तक इन बारह वर्षों में वीरेंद्र शर्मा अब तक 75 के करीब फर्स्ट क्लास मैचों में अंपायरिंग कर चुके हैं और साथ ही वर्ष 2015 से आईपीएल में भी लगभग 30 मैचों में बतौर ऑन फील्ड व थर्ड अंपायर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके है।
वर्ष 2019 में बीसीसीआई के घरेलू अंपायरिंग पैनल में वीरेंद्र शर्मा को अंपायरिंग के लिए प्रथम रैंकिंग का दर्जा प्राप्त है। आईसीसी अंपायर बनने के पश्चात वरिंद्र शर्मा को अगले महीने भारत में होने वाली श्रीलंका के टी-20 मैच सीरीज व साथ ही ऑस्ट्रेलिया के साथ होने वाली घरेलू वनडे सीरीज में भी अंपायरिंग करने की जानकारी आईसीसी के तरफ से मिल चुकी है।
भारत सरकार के लोक उपक्रम "इंजीनिरिंग इंडिया लिमिटेड" में कार्यरत वीरेंद्र शर्मा अपने पिता स्वर्गीय रुलिया राम शर्मा को अपना प्रथम गुरु व मार्गदर्शक मानते हैं उनके इस चयन पर उनके परिवार के सदस्य माता शकुंतला,पत्नी सारिका शर्मा व बेटी वेरोनिका भीउत्साहित हैं।
अपने चयन पर वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि आईसीसी अंपायर्स पैनल में चयनित होने पर मैं बहुत खुश हूं वर्ष 1987 से एक क्रिकेट खिलाड़ी के रूप में कैरियर की शुरूआत की थी और 2007 में तत्कालीन एचपीसीए के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर की प्रेरणा से अंपायरिंग प्रारम्भ की। अनुराग ठाकुर मेरे क्रिकेटिंग करियर में हमेशा मार्गदर्शक के रूप में रहेंगे।
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