
अमृतसर | आजकल 90 प्रतिशत लोग किसी न किसी रूप में जाने-अनजाने दांतों-मसूड़ों के रोगों से ग्रस्त हैं। 50 प्रतिशत लोग इससे बिलकुल अनजान हैं और कुछ जानते हुए भी ध्यान नहीं देते हैं। डेंटागम के एमडी अशोक अग्रवाल ने बताया कि लोग दंत चिकित्सा के लिए तभी जाते हैं जब रोग काफी बढ़ जाता है। मसूड़ों से खून निकलना, दांतों पर ठंडा-गर्म, मसूड़ों में सोजिश, सूजन और घाव, मसूड़ों का दांतों की जड़ छोड़ना, मसूड़ों से पस निकलना, दांत हिलना और मुंह से दुर्गंध आना आदि दांतों के खराब होने के लक्षण हैं। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इनकी रोकथाम न की जाए तो दांतों-मसूड़ों का सबसे खतरनाक रोग पायरिया हो जाता है। जंकफूड और अत्यधिक बारिक मैदा युक्त खाने के पदार्थ का सेवन बहुत बढ़ गया है, जिसमें मुंह में प्लाक अधिक मात्रा में जमा होती है जो टूथपेस्ट हम दांतों की सफाई के लिए प्रयोग करते हैं वह केवल दंत मंजन का कार्य ही करता है। अग्रवाल ने बताया कि इस सभी मुश्किलों का इलाज करने के लिए डेंटागम हर्बल पेस्ट तैयार किया गया है। यह दांतों-मसूड़ों में होने वाले रोगों का उपचार करने सक्षम है। इसका एक्टिव द्रव्य जड़ी-बूटी से तैयार किया जाता है, जो केवल लाभकारी प्रभाव पैदा करता है।
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