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सरकार के खजाने में बचे हैं 540 करोड़, देनदारी 35 हजार करोड़ की

रोहित रोहिला | चंडीगढ़
आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया और उस पर करोड़ों का बकाया... पंजाब सरकार का आर्थिक संकट गहरा गया है। मौजूदा स्थिति ये है कि सरकार के खजाने में अभी सिर्फ 540 करोड़ रुपए ही बचे हैं, जबकि सरकार की देनदारियां करीब 35 हजार करोड़ की हैं। सरकार पर चालू वित्त वर्ष के दौरान वेतन, पेंशन और ब्याज पर 52,274 करोड़ की देनदारियां थीं। फिस्कल इंडिकेटर के अनुसार 7 महीने में 17260.45 करोड़ दिए गए। बाकी 5 महीने में 35013.55 करोड़ की देनदारी बची है। इनमें से कर्मचारियों के डीए और एरियर का ही 60 करोड़ के अलावा 5 हजार करोड़ के कई बिल भी पेंडिंग पड़े हैं। वहीं, सरकार पर 2.13 लाख करोड़ कर्ज है और इसके ब्याज के तौर पर हर साल 4781.31 करोड़ देने पड़ रहे हैं। आमदनी की बात करें तो अभी तक 25% यानी एक चौथाई ही राजस्व मिला है, जबकि केंद्र से 3 महीने से जीएसटी के 4100 करोड़ भी नहीं मिले हैं। सरकार सूबे के आर्थिक हालात ठीक करते नजर आ रही है या नहीं, कोई प्रयास नहीं दिखते। अगर जल्द ही आर्थिक संकट पर काबू नहीं पाया तो कुछ महीनों में ही सूबे के 3.5 लाख कर्मचारियों को वेतन के और 2.5 लाख पेंशनधारकों को पेंशन, डीए के लाले पड़ेंगे ही, फ्लाईओवर, सड़क समेत स्कूलों व अस्पतालों के विकास कार्य भी रुक जाएंगे। सरकार को विभिन्न टैक्स से 26131.84 करोड़ का राजस्व मिला है, जबकि 25754.86 करोड़ खर्च किए हैं। यानी सिर्फ 376.98 करोड़ ही बचे हैं। कुल मिलाकर नवंबर तक खजाने में 540 करोड़ रुपए ही हैं।

आमदनी कम होने की 3 वजह

1. लक्ष्य से कम राजस्व की प्राप्ति:बजट में विभिन्न टैक्स से होने वाली आमदनी का लक्ष्य 113852.75 करोड़ रखा था। पर अभी तक 26131.84 करोड़ ही मिले हैं। यानी 84720.91 करोड़ कम हैं। राजस्व वसूली क्यों कम हुई, सरकार के पास जवाब नहीं है।

2. जीएसटी का पैसा नहीं मिलना:दूसरी वजह जीएसटी का 3 महीने से पैसा नहीं मिलना है। अगर यह 4100 करोड़ समय पर मिल जाते तो ऐसी नौबत नहीं आनी थी।

3. लोन रिकवरी में भी फिसड्‌डी:सरकर ने 2019-20 में लोन रिकवरी का 15685.18 करोड़ का लक्ष्य रखा था। लेकिन अगस्त तक केवल 312.46 करोड़ रुपए की ही रिकवरी हो पाई। रिकवरी में नाकाम सरकार जीएसटी का ही रोना रो रही है।

सरकार के आर्थिक हालात का खजाने पर ये पड़ेगा असर

  • खजाना खाली होने से सूबा सरकार केंद्र पर निर्भर हो जाएगी कि वह कोई ग्रांट देता है या नहीं। वर्ल्ड बैंक से पैसा तक मिलने की गारंटी नहीं रहेगी। ऐसे में सरकार को अपनी प्राॅपर्टी या तो बेचनी पड़ेगी या फिर गिरवी रखनी पड़ेगी।
  • खजाने में 5 हजार करोड़ के बिल पेंडिंग हैं। सरकार के पास पैसा नहीं है। इससे हर माह सरकार पर बिलों की आउट स्टेडिंग बढ़ती जाएगी।
  • बेरोजगारों को 2500 रुपए भत्ता व युवाओं को स्मार्ट फोन देने का वादा किया था। इस पर 75 करोड़ खर्च होंगे। करीब 9 लाख बेरोजगार हैं। इस हिसाब से 225 करोड़ बनेंगे। स्मार्ट फोन को भी 100 करोड़ रखे थे।
  • बुढ़ापा पेंशन को 750 से 2500 रुपए करने का वादा किया था। लेकिन अभी तक नहीं कर पाई है। सूबे में 19.20 लाख पेंशन धारक हैं। इस हिसाब से सरकार पर 480 करोड़ रुपए का बोझ पड़ता।

विकास कार्य रुकेंगे

विकास कार्य कर रहीं कंपनियों के बिलों का भुगतान नहीं होने की सूरत में ठेकेदार या कंपनी काम बीच में ही छोड़ देंगे।

ये बोले वित्त मंत्री...
सरकार का अर्थ तंत्र


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कार्टून।


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सरकार के खजाने में बचे हैं 540 करोड़, देनदारी 35 हजार करोड़ की सरकार के खजाने में बचे हैं 540 करोड़, देनदारी 35 हजार करोड़ की Reviewed by Dibyendu on 16:13 Rating: 5

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