चंडीगढ़(सुशील भार्गव).प्रदेश में सड़क हादसों में कमी लाने के लिए नई दिल्ली के हरियाणा बार्डर से अम्बाला तक एनएच-44 का ऑडिट कराया जाएगा। ऑडिट का कार्य शुरू कर दिया गया है। ऑडिट के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि हादसे किस कारण होते हैं, कहां-कहां किस तरह की दिक्कत हैं। जिस विभाग को हाइवे से संबंधित जो जिम्मा सौंप रखा है, क्या संबंधित विभाग अपना कार्य बखूबी निभा रहे हैं। किस इलाके में वाहन की कितनी स्पीड होनी चाहिए आदि।
सर्वे टीम सर्वे रिपोर्ट तैयार कर विभाग को सौंपेगी, इसके बाद तेजी से कार्रवाई शुरू होगी। हालांकि प्रदेश में सड़क हादसों में कमी आई है, जनवरी से सितंबर 2019 तक सड़क हादसों से होने वाली मृत्यु दर में गत वर्ष इसी अवधि की तुलना में 3.55 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है। सड़क दुर्घटनाओं और घायल व्यक्तियों की संख्या में भी क्रमशः 4.47 प्रतिशत और 5.74 प्रतिशत की कमी आई है। जनवरी और सितंबर के बीच सड़क दुर्घटना से होने वाली मृत्यु की संख्या 3882 से घटकर 3744 रह गई है।
फरीदाबाद की संस्था के साथ एमओयू साइन
हरियाणा हाइवे एवं ट्रैफिक आईजी ने सभी जिलों के एसपी को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि अगले महीने से धुंध आ रही है, इससे पहले ही सभी तरह के इंतजाम पूरे कर लिए जाने चाहिए। सड़कों पर सफेद पट्टी लगाने, आमजन को जागरूक करने के लिए कहा गया है। साथ पुलिस कर्मियों की भी डयूटी लगाई जाएगी तो वाहन चालकों को जागरूक करेंगे।
प्रदेश में नेशनल हाईवे पर 31.78 % होते हैं हादसे
ऑडिट के लिए नेशनल हाइवे नंबर 44 को इसलिए चुना है क्योंकि उत्तर भारत के अधिकांश लोग रोजाना यहीं से सफर करते हैं। विभाग की एक रिपोर्ट पर गोर किया जाए तो हरियाणा में नेशनल हाइवे पर सबसे अधिक 31.78 फीसदी हादसे होते हैं, जबकि स्टेट हाइवे पर 25.69, एक्सप्रेस हाइवे पर 2.19 फीसदी हादसे होते हैं। अन्य सड़कों पर 40.34 फीसदी हादसे होते हैं। अब पहले दिल्ली से अम्बाला और फिर दूसरे नेशनल हाइवे पर इस तरह का ऑडिट कराया जाएगा।
20.86 फीसदी हादसे होते हैं तेज गति से
एक रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में तेज गति हादसों का कारण बनती है, इससे प्रदेश में 20.86 फीसदी सड़क हादसे होते हैं। इसमें कुल डेथ में 22.15 फीसदी हिस्सा है। ओवर लोडिंग के कारण 17.01 फीसदी हादसे और 17.47 फीसदी डेथ प्रतिशत है। शराब पीकर 4.70 फीसदी हादसे होते हैं और 3.28 फीसदी डेथ प्रतिशत है। अन्य हादसों में 57.43 फीसदी कारण हैं और इनमें 57.10 फीसदी डेथ औसत है।
17 से 44 साल तक के लोगों की अधिक मौत
इनमें 17 साल तक के 5.26 फीसदी, 17 से 44 साल के 59.05 फीसदी व 45 साल से अधिक के 35.69 फीसदी लोगों की मौत हो रही है। 17 से 44 साल के लोग सबसे अधिक मर रहे हैं, इनका डेथ औसत करीब 50 फीसदी है। प्रदेश के हाइवे पर ट्रक-टेंपो व ट्रैक्टर से सबसे अधिक 35.38 फीसदी हादसे होते हैं, इससे 37.42 फीसदी डेथ होती हैं। कार-जीप व टैक्सी से 31.60 फीसदी हादसे होते हैं और 35.46 फीसदी डेथ होती है।
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