संविधान देश का वह ग्रंथ है, जिसे बाबा साहब ने 2 वर्ष 11 महीने और 18 दिन में तैयार किया। बाबा साहब को संविधान तैयार करते समय बहुत कठिन प्रस्थितियों से गुजरना पड़ा और कई अपमानों का सामना करना पड़ा। उनकी महानता का परिचय तब सामने आया, जब उन्होंने संविधान की रचना की और संविधान को तैयार करते समय उनमें किसी प्रकार की द्वेष भावना नहीं थी। यदि वे चाहते तो, अपने ऊपर हुए जाती व्यवस्था के कारण अपमान का बदला ले सकते थे। जबकि बाबा साहब ने मनुवादी कहर को जीवन के अंतिम पड़ाव तक झेला है। जाति व्यवस्था के कारण बाबा साहब को जीवन के हर कदम पर लज्जित और अपमानित होना पड़ा।
बाबा साहब को नौकरी के दरमियान अपने दफ्तर में काम करने वाले चपरासी से अपमानित होना पड़ा था कयोंकि चपरासी बाबा साहब को फाइलें दूर से फेंक कर दिया करते थे और आफिस में बाबा साहब के द्वारा पीने का पानी मांगने पर कोई उन्हें पानी नहीं देते थे। क्योंकि बाबा साहब दलित थे और चपरासी ऊंचे कुल के ब्राह्मण थे। उन्होंने कहा कि बाबा साहब द्वारा रचित संविधान की खासियत यह है कि संविधान को विश्व का कोई भी देश नकार नहीं सकता। कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं द्वारा भी बाबा साहब के जीवन पर प्रकाश डाला गया। अंत में सभी सदस्यों द्वारा बाबा साहब को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।
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2 वर्ष 11 महीने और 18 दिन में बना भारत का संविधान : गोपीचंद सांदड़
Reviewed by Dibyendu
on
18:07
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