
प्रसिद्ध खेती विज्ञानी प्रोफेसर एएस आहलूवालिया ने ऐलगल बायो खाद और जीवाणुओं के प्रयोग की महत्ता पर ज़ोर दिया और बताया कि यह कैसे सेहतमंद वातावरण, आर्थिक लाभ और सामाजिक -आर्थिक इकुइटी के तीन मुख्य उद्देश्यों के साथ टिकाऊ कृषि की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। इस मौके वह रयात बाहरा यूनिवर्सिटी के जीव विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित माक्रोबियल फोटोआटोट्रोफसज़ की संभावना विषय पर एक एक्सपर्ट टॉक दौरान भाषण दे रहे थे। लाईफ साईंसिज और एग्रीकल्चर के 250 से अधिक विद्यार्थियों ने इस एक्सपर्ट टॉक में हिस्सा लिया। प्रोफेसर आहलूवालिया ने ज़ोर देकर कहा कि अगर हम आने वाली पीढियों के सेहतमंद भविष्य को यकीनी बनाना चाहते हैं,तो बायो खाद बहुत महत्वपूर्ण है। इस मौके डा. सिमरजीत कौर, जीव विज्ञान विभाग की प्रमुख ने इस बात पर विचार किया कि किस तरह कृषि के उत्पादकता को उत्साहित करने के लिए आधुनिक कृषि खादें पर भारी निर्भर हैं और सेंथेटिक खादों के विशाल प्रयोग मानवीय सेहत और वातावरण के लिए गंभीर ख़तरा हो सकती है। इस लिए टिकाऊ कृषि के लिए एकसार वातावरण -समर्थकी पहुँच के तौर पर रोगाणुयों के प्रयोग की तरफ तबदील करने पर ध्यान केन्द्रित करने की ज़रूरत है।
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