
पटियाला|गत दिनाें माता काैशल्या अस्पताल में भर्ती 9 महीने की गर्भवती के पेट में बच्चे के मरने के मामले में अाज अस्पताल की एमएस डाॅ. रेनू अग्रवाल ने मामले की जांच के लिए तीन मेंबरी टीम का गठत कर दिया है। यह टीम दाे दिन में छानबीन करने के बाद अपनी रिपाेर्ट साैंपेगी। िरपाेर्ट के अाधार पर अगली कार्रवाई हाेगी कि बात कही जा रही है। डाॅ. रेनू खुद मानती है कि कहीं न कहीं गलती हुई है जिस कारण एक मां ने पेट में पल रहे बच्चे काे जन्म देने से पहले ही खो दिया। उन्हाेंने कहा कि मामले में जाेकि भी दाेषी हाेगा कार्रवाई निश्चित हाेगी। मंगलवार काे पीड़ित परिवार एमएएस से मिली अाेर लापरवाह स्टाफ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।भादसाें में पड़ते गांव दंदराला खुर्द निवासी गुरसेव सिंह ने बताया कि उसकी प|ी 15 नवंबर काे भर्ती हुई थी अाेर 22 नवंबर काे प|ी के पेट में बच्चे की माैत हाे गई। उनका अाराेप है कि अगर काेई खतरे की बात थी ताे डाॅक्टर द्वारा कराए गए अल्ट्रासाउंड में स्थिति साफ हाे गई हाेगी, लेकिन डाॅक्टर ने एेसा कुछ नहीं बताया। एडमिट करके दवाएं देते रहे। उन्हाेंने बताया कि 10 दिनाें एडमिट प|ी की डिलीवरी में दिक्कत क्या अा रही है। इस बारे में डाॅक्टर से कई बार पूछ लेकिन उन्हाेंने कुछ साफ नहीं किया। अाराेप है कि जब उसकी प|ी के पेट में बच्चा ठीक नहीं था ताे उसके बारे में पहले बताना चाहिए था अाेर डिलीवरी पहले भी कराई जा सकती थी, लेकिन डाॅक्टराें ने एेसा नहीं किया। परिजनों ने डाॅक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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