खनन ठेकेदारों ने बदला यमुना नदी का प्रवाह, स्टांप शुल्क के 24 करोड़ फंसे, 1476 करोड़ के राजस्व का भी नुकसान
चंडीगढ़.कैग की रिपोर्ट में खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि ठेकेदारों ने खनन में इस कदर मनमानी बरती कि इससे यमुना नदी का प्रवाह ही बदल गया। ठेेकेदारों पर आरोप है कि नदी के प्रवाह में बाधा बन गए और नदी का प्रवाह बदल गया।
चयनित रेत और बोल्डर बजरी खदानों के भू-स्थानिक सर्वेक्षण से पता चला है कि खनन योजनाओं में दिए गए खनक स्थलों के को-आॅर्डिनेट साइट निरीक्षण पर दर्शाए को-आर्डिनेट से भिन्न थे। खनन ठेकेदारों को स्टांप शुल्क और पंजीकरण फीस 24.36 करोड़ रुपए की फीस कम जमा कराई है। कैग रिपोर्ट में यह बड़ा खुलासा हुआ कि स्टोर क्रेशर चलाने के लाइसेंसों के नवीनीकरण में विलंब, ईंट भट्ठा स्वामियों से रॉयल्टी, अतिरिक्त रॉयल्टी और उस पर ब्याज की कम वसूली, अवसूली के मामले सामने आए हैं।
इसके परिणामस्वरूप 1476.21 करोड़ रुपए के राजस्व की हानि हुई। खनन के प्रति सरकार की लापरवाही उजागर हुई है। सरकार ने खदान और खनिज विकास, पुर्नउद्धार पुनर्वास निधि में अपने हिस्से के 17.70 करोड़ रुपए जमा नहीं कराए। जबकि 4.61 करोड़ रुपए का ब्याज क्रेडिट नहीं किया।
48 ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं
विभाग ने खदान और खनिज विकास एवं पुनर्वास नधिमि में 49.30 करोड़ रुपए की राशि जमा न कराने वाले 48 ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। इन ठेकेदारों की तरफ 17.44 करोड़ रुपए भी बकाया था। यही नहीं संविदा राशि 808.21 करोड़ रुपए जमा न कराने वाले 84 ठेकेदारों में से सरकार ने 69 के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। इन पर करीब 347 करोड़ रुपए ब्याज के बकाया हैं।
माल ढोने वाले वाहन मालिकों ने नहीं दी राशि
रिपोर्ट में उल्लेख किया कि वर्ष 2016-17 के दौरान माल ढोने वाले 1584 वाहन मालिकों ने माल कर जमा नहीं कराया। इनसे 1.62 करोड़ रुपए की वसूली नहीं की गई। इन पर 61.33 लाख रुपए ब्याज भी बकाया था। यही नहीं माल ढोने वाले 1305 वाहन मालिकों ने 2015-16 व 2016-17 के दौरान टोकन टैक्स जमा नहीं कराया, इससे 18.42 लाख रुपए की वसूली नहीं हुई। इन पर 36.84 लाख रुपए की पेनल्टी भी बकाया थी।
ईंट-भट्ठों के 181 मामलों में रॉयल्टी जमा नहीं
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 4139 ईंट भट्ठा स्वामियों में से 181 मामलों में रॉयल्टी एवं अतिरिक्त रॉयल्टी के तौर पर 0.53 करोड़ रुपए जमा नहीं कराए। इन पर 0.24 करोड़ रुपए ब्याज भी बकाया था।
लापरवाही: कम सिक्योरिटी के चलते निगम पर पड़ी दोगुनी मार
बिजली वितरण कंपनियों की लापरवाही के चलते निगमों को दोहरा नुकसान हुआ है। उपभोक्ताओं से अतिरिक्त अग्रिम उपभोग राशि नहीं जमा करवाने से 1050 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ। निगम उपभोक्ताओं से 935 करोड़ 91 लाख रुपए अग्रिम राशि के तौर पर वसूलने में भी विफल रहे। बिजली निगमों को अतिरिक्त ब्याज के तौर पर 122 करोड़ 5 लाख रुपए की चपत लगी। यह खुलासा विधानसभा में रखी कैग रिपोर्ट में हुआ है।
रिपोर्ट में 2013 से 2016 के दौरान निगमों को सी एंड टी लॉस के चलते 2703 करोड़ 69 लाख रुपए का नुकसान उठाना पड़ा। निगमों ने सी एंड टी लॉस में सुधार किया। हरियाणा राज्य बिजली विनियामक आयोग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए टैरिफ आदेशों के विरुद्ध महिला उपभोक्ताओं को 2005-06 और 2017-18 में 14 करोड़ 40 लाख रुपए की रियायत दी गई। सरकार ने आयोग की मंजूरी के बिना रेट कम किय तो इससे भी 6 करोड़ 41 लाख रुपए का नुकसान हुआ।
कृषि : कम वसूली से 15 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान
कृषि पंप सेट मीटर वाले उपभोक्ताओं से न्यूनतम मासिक प्रभारों एवं नियत प्रभारों की कम वसूली हुई। मीटर किराए के कम प्रभारण के कारण निगमों को 15 करोड़ से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा। मार्च-2018 तक बिजली कंपनियों ने एचईआरसी द्वारा निर्धारित संग्रहण दक्षता के लक्ष्य को हासिल नहीं किया था। यही नहीं मार्च-2014 में यह बकाया 4460 करोड़ 18 लाख रुपए था, जो अब मार्च-2018 में बढ़कर 7332 करोड़ 70 लाख पहुंच गया।
कंपनी ने बिजली के ट्रांसफार्मर के तेल की खरीद ओपन टेंडर की बजाय लिमिटेड टेंडर से की। इससे निगम को 5 करोड़ 34 लाख रुपए अतिरिक्त खर्चने पड़े। निगम द्वारा खरीदे गए बिजली उपकरणों का इस्तेमाल भी इसलिए नहीं किया जा सका क्योंकि एनएबीएल सूचीबद्ध प्रयोगशालाओं से गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट हासिल करने में देरी की गई। इससे कंपनी का 198 करोड़ 54 लाख से अधिक का सामान इस्तेमाल नहीं हो पाया।
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