शिमला.शहर के धामी में सालों से खेला जाने वालाखूनीखेल एक बारफिर आज खेला गया। इस खेल में पत्थरबाजों की टोलियां दूसरी टोलियों पर पत्थरों से प्रहार करती है। इस खेल में जिस युवक के सिर परपत्थर लगने के बाद खून निकलता है उस खून को मां काली के मंदिर में चढ़ाया जाता है।
इस खेल में जब कोई युवक घायल हो जाता है तो खेल को बंद कर दियाजाता है। दिवाली के अगले दिन खेलेगए इस खेल में कई युवक घायल हो गए।
शिमला से 30 किलोमीटर दूर धामी में खुन्द समुदाय के लोग सड़क पर खड़े हो एक दूसरे को पत्थर मारते यह लोग। ये कोई दंगा फसाद नहींबल्कि यहां दो गुटों के लोग सदियों से चली आ रही परम्परा को निभा रहे हैं।
गांव धामी सेपत्थर मेले की ये तस्वीरें हैं जो किसी को भी हैरत में डाल दे। हर साल धामी में पत्थर मेले का आयोजन किया जाता है जिसके तहत दो गुट एक दूसरे पर जम कर पत्थरो की बारिश करते हैं। शिमला के धामी इलाके में दीवाली के दूसरे दिन ये अनोखा मेला मनाया जाता है।
पत्थरबाजी में जिसके सिर पर चोट लगती है उसके खून से काली माता को तिलक लगाया जाता है । परम्परा के मुताबिक़ ऐसा करने से इलाके में खुशहाली बनी रहती है और इलाके में महामारी भी नही आती। राज परिवार के साथ कटैड़ू, तुनड़ु, दगोई, जठोटी खुंद के लोग शामिल थे, जबकि दूसरी टोली में जमोगी खुंद के लोग शामिल थे।
करीब 10 मिनट तक खेला जाता है
इस खेल को करीब 10 मिनट तक खेला जाता है।जब किसी व्यक्ति के चोट लगने पर खून निकलता है तो खेल को तुरंत बंद कर दिया जाता है और उसका खून काली मां के मंदिर में चढ़ाया जाता है।इस खेल को खेलने वाले हर खिलाड़ी की यही इच्छा होती है कि इस बार मां के मंदिर में उसका खून चढ़े।मां के मंदिर में खून चढ़ाना शुभ माना जाता है।दरअसल, देव भूमि हिमाचल में कई ऐसी अजीबोगरीब परंपराएं हैं, जो आज भी जिंदा हैं।
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