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हकीकत राय समाध पर आज मनाई जाएगी बसंत पंचमी

बसंत पंचमी का पर्व और बटाला शहर का आपस में गहरा जुड़ाव है। बसंत पंचमी को ऋतुराज और पतंगों के त्यौहार के तौर पर मनाया जाता है। बटाला में आज इस दिन बाल शहीद वीर हकीकत राय के धर्म की खातिर दिए गए बलिदान को याद गया जाएगा। बटाला और वीर हकीकत राय में गहरा रिश्ता रहा था। हकीकत राय की ससुराल बटाला में थी। हकीकत की शहादत के बाद बटाला में उनकी प|ी लक्ष्मी देवी सति हो गई थी। बसंत पंचमी के दिन सति लक्ष्मी देवी की समाधि पर मेला लगता है, जहां लोग बाल दंपति को श्रद्धांजलि देते हैं। दैनिक प्रार्थना सभा द्वारा शहीदों को समर्पित समारोह का आयोजन किया जाता है। बच्चों के लिए लगाए जाने वाले बाल भोग में बच्चों को पकवान परोसे जाते हैं और स्कूलों की टीमों में देश भक्ति पर आधारित कार्यक्रम करवाया जाता है।

बसंत पंचमी बाल शहीद वीर हकीकत राय के धर्म की खातिर दिए गए बलिदान को किया जाएगा याद

बटाला में सति लक्ष्मी देवी की समाधि।

12 साल की उम्र में लक्ष्मी से हुई शादी

वीर हकीकत राय का जन्म 1720 में पाकिस्तान के सियालकोट में लाला भागमल पुरी के घर हुआ। उनका विवाह बटाला के कादी हट्टी मोहल्ला में रहने वाले किशन सिंह उप्पल की बेटी लक्ष्मी देवी से बारह वर्ष की आयु में कर दिया गया था, पर वह बटाला में अपने परिवार में रहती थी। उस समय देश में मुसलमानों का राज था। देश में सभी काम फारसी में होते थे और व्यापार की भाषा भी फारसी ही थी। इसी कारण से भागमल पुरी ने अपने पुत्र को फारसी सीखने के लिए मौलवी के पास मदरसे में पढ़ने के लिए भेज दिया। मुस्लिम सहपाठी उनसे हिंदु होने के कारण उससे घृणा करते थे।

दुर्गा के प्रति अपशब्द नहीं सहे

एक बार हकीकत राय का अपने मुसलमान सहपाठियों के साथ झगड़ा हो गया। उन्होंने माता दुर्गा के प्रति अपशब्द कहे, जिसका हकीकत ने विरोध करते हुए कहा, मुस्लिम सहपाठियो को जब पलट कर जवाब दिया तो इस पर मुस्लिम बच्चों ने शोर मचा दिया कि इन्होंने इस्लाम का अपमान किया है। साथ ही उन्होंने हकीकत को मारना पीटना शुरू कर दिया। मदरसे के मौलवी ने भी मुस्लिम बच्चों का ही पक्ष लिया। शीघ्र ही यह बात सारे सियालकोट में फैल गई। लोगों ने हकीकत को पकड़ कर मारते-पीटते स्थानीय हाकिम अदीना बेग के समक्ष पेश किया गया। इस दौरन मुस्लिम लोग उसे मृत्यु-दण्ड की मांग करने लगे। हकीकत राय के माता-पिता ने भी दया की याचना की। तब अदीना बेग ने कहा मैं मजबूर हूं, परंतु यदि हकीकत इस्लाम कबूल कर ले तो उसकी जान बख्श दी जाएगी। किन्तु उस 14 वर्ष के बालक हकीकत राय ने धर्म परिवर्तन करने से इंकार कर दिया तो काजी व मौलवी और सारे मुस्लमान उसे मारने को तैयार हो गए।

इस्लाम कबूल करने से मरना बेहतर

लाहौर में उसे नवाब जकरिया खान के समक्ष पेश किया गया। मुसलमानों के दबाव में आकर नवाब जकरिया खान ने हकीकत को मृत्यु दंड दे दिया। 1734 में बसंत पंचमी के दिन सबके सामने जल्लाद ने तलवार के एक ही वार से 14 साल के मासूम की गर्दन धड़ से अलग कर दी। जब हकीकत के शव का लाहौर में संस्कार हो रहा था, ठीक उसी समय बटाला में उसकी 12 वर्ष की प|ी लक्ष्मी देवी भी चिता सजा कर सती हो गई। बटाला में आज भी उनगनकी समाधि मौजूद है, जहां हर बसंत पंचमी पर मेला लगता है और इस पर्व को भारी उत्साह से मनाया जाता है।



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हकीकत राय समाध पर आज मनाई जाएगी बसंत पंचमी हकीकत राय समाध पर आज मनाई जाएगी बसंत पंचमी Reviewed by Dibyendu on 18:08 Rating: 5

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