
बठिंडा| पंजाब में एक हजार से ज्यादा रजिस्टर्ड हीमोफीलिया मरीज हैं, इसी तरह बठिंडा जिले में करीब 30 मरीज हीमोफीलिया रजिस्टर्ड है। सरकार की ओर से इन मरीजों के इलाज का प्रबंध जिले के सरकारी अस्पताल करने जा रही, फरवरी माह के अंतिम सप्ताह तक शुरू होने की उम्मीद है। इस संबंध में मंगलवार को शहर के ड्यून क्लब में आयोजित किए गए कार्यक्रम में डाॅ. वरुण कॉल एसोसिएशन प्रोफेसर डिर्पाटमेंट ऑफ पेडियाट्रिक्स जीजीएस मेडिकल कालेज फरीदकोट विशेष तौर पर उपस्थित हुए। इस मौके सिविल अस्पताल बठिंडा और मानसा से माहिर डाक्टरों ने भी भाग लिया। डाॅ. वरुण कॉल ने सैनीटाइजेशन प्रोग्राम ऑन बेसिक हीमोफीलिया एंड मैनेजमेंट विषय पर उपस्थित डाॅक्टरों को विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान की। डाॅ. वरुण ने बताया कि यह एक अनुवांशिक बीमारी है, जिसमें रक्त प्रोटीन की कमी हो जाने पर खून के थक्के जमने में बाधाएं आती हैं। खून में मौजूद ‘थ्राम्बोप्लास्टिन नामक पदार्थ की भरपाई के लिए रक्त प्रोटीन यानी ‘क्लॉटिंग फैक्टर की जरूरत पड़ती है। फैक्टर-8 के नाम से चर्चित खून का यह अवयव बाजार में काफी महंगा मिलता है। जल्द ही राज्य के सभी जिला अस्पतालों में हीमोफीलिया की जांच की सुविधा तो रहेगी ही, रोगियों का इलाज भी कराया जाएगा। इस दौरान वुमेन एंड चिल्ड्रन अस्पताल एसएमओ डाॅ. सुखजिंदर सिंह गिल, शिशु रोग माहिर डाॅ. सतीश जिंदल, डाॅ. रविकांत गुप्ता, सरकार ब्लड बैंक इंचार्ज डाॅ. रजिंदर कुमार, डाॅ. जयंत अग्रवाल के अलावा बठिंडा व मानसा से अन्य डाक्टर उपस्थित थे।
ड्यून क्लब में आयोजित कार्यक्रम में जानकारी देते हुए डाॅ. वरुण।
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