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मातृ सुख से दूर महिला का संघर्ष है ‘दीया बले सारी रात’


पटियाला | हेरिटेज फेस्टिवल के चौथे दिन यानी मंगलवार को एनआईएस में मरहूम हरपाल टिवाना के 1970 में लिखे गए नाटक दिया बले सारी रात’ का मंचन किया गया। इसमें आइशा की कहानी दिखाई गई। अाइशा गांव की सुंदर लड़की है। विवाह के लिए अाइशा काे पिता बड़ी उम्र के जानी को बेच देता है। शादी के बाद अाइशा मां नहीं बन पाती। जाॅनी अाैर अाइशा के संवाद ने लाेगाें काे झकझाेरा। नीना टिवाना, निर्मल ऋषि, मनपाल टिवाना, विकास जुनेजा, महरीन कालेका, फतह इंद्र गर्ग, डा. इन्द्रा बाली, डा. मोना गुरकिरन कौर, डा. मिन्नी सिंह, वकील मान, रणधीर सिंह गिल, सुखविन्दर सोही और खेम सिंह ने अभिनय किया।



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मातृ सुख से दूर महिला का संघर्ष है ‘दीया बले सारी रात’ मातृ सुख से दूर महिला का संघर्ष है ‘दीया बले सारी रात’ Reviewed by Dibyendu on 17:58 Rating: 5

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