कहने को तो शहर में कैरीबैग बैन हैं, लेकिन उसके बावजूद खुलेआम कैरीबैग का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसका नतीजा यह निकल रहा है कि लोगों की ओर से खुले में कैरीबैग फेंक रहे हैं। जिसे सड़कों पर घूम रहे आवारा पशु खा कर अपनी जान गंवाने के लिए मजबूर हैं। इसके बावजूद ना तो नगर निगम शहर में कैरीबैग की बिक्री तथा इस्तेमाल पूरी तरह से रोक लगा पाया है और ना ही सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं की देख-रेख के लिए कोई पुख्ता कदम उठाए गए हैं। सख्त कदम उठान की जरूरत कब से ही है लेकिन इसकी तरफ कोई भी ध्यान नहीं दिया जा रहा।
हालाकि अलग - अलग विभागों के पास काऊ सैस का करोड़ों रुपया पड़ा है जिससे गायों की देख-रेख अच्छे से की जा सकती है। लेकिन वो सारा काऊ सैस का पैसा उन विभागों के पास ही पड़ा है और उसका अब तक कोई इस्तेमाल नहीं किया गया है।
हाईकोर्ट में जवाब देने से पहले निगम निकलता है कार्रवाई करने: नगर निगम की ओर से कैरीबैग को पूरी तरह से बंद करवाने के लिए कोई गंभीर कदम नहीं उठाए जाते हैं। हालाकि निगम की ओर से शहर में कैरीबैग बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई ताे की जाती है लेकिन वे कार्रवाई भी मात्र खानापूर्ती के नाम पर होती है। जैसे ही हाई कोर्ट में कैरीबैग के खिलाफ डाली याचिका की तारीख पास आती है और नगर निगम को हाईकोर्ट में जवाब देना होता है तो निगम कार्रवाई करने के लिए शहर में निकलता है।
निगम को करनी चाहिए सख्त कार्रवाई, ताकि गायों की मृत्यु को रोका जा सके: जानकारी देते हुए गौ सेवा कमिशन पंजाब के सदस्य राजवंत राय शर्मा ने कहा कि नगर निगम को शहर में कैरीबैग बैन करवाने की पॉलिसी को सख्ती से लागू करवाना चाहिए। क्योंकि कैरीबैग खाने से सड़कों पर घूमने वाली गायों की मृत्यु होती है। उन्होंने कहा कि देखा गया है कि शहर की सड़कों पर जो पशु पकड़ कर गऊ शाला ले जाए जाते हैं और वो बीमार होते हैं।
कई गायों की मृत्यु होने के बाद जब उनका पोस्टमार्टम करवाया जाता था तो उसमें देखा गया कि एक-एक गाय के पेट में से 40 से 45 किलो तक पॉलीथिन निकलता था। जो कि गायों की मौत का कारण बनता है।
शहर में जगह-जगह लगे कचरे के ढेर: राजवंत राय शर्मा ने कहा कि वहीं देखने में आया है क इन दिनों शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। क्योंकि अब निगम की ओर से शहर की गारबेज कंटेनर साइट्स पर से कंटेनर हटा लिए गए हैं। लेकिन लोगों की ओर से फिर भी उन पॉइंट्स पर ही गारबेज फेंका जा रहा है।
उन्होंने कहा कि निगम की ओर से प्लान बनाया गया था कि उन साइट्स से कंटेनर हटा कर वहां पर टीमों की नियुक्ति की जाएगी ताकि वहां पर लोग दोबारा से गारबेज ना डाले। लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया जिस कारण शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं जिन्हें पशु खा कर बीमार हो रहे हैं। इसकी तरफ ध्यान देना चाहिए ताकि बेजुबान गायाें ना मारे जाएं।
काऊ सैस का पैसा विभागों के पास ही पड़ा है उसका अब तक कोई इस्तेमाल नहीं किया गया है।
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कहने को कैरीबैग बैन, सड़कों पर गाय पॉलीथिन खाकर मरने को मजबूर
Reviewed by Dibyendu
on
18:21
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