दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की अमन नगर में तीन दिवसीय श्री शिव कथा का आयोजन कराया। साध्वी ज्योत्सना भारती ने कहा कि वैसे तो मनुष्य भारतीय संस्कृति का प्रत्येक त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाता है परन्तु उसमें छिपे दिव्य रहस्यों से शिक्षा ग्रहण नहीं कर पा रहा। आज मनुष्य अपने वास्तविक मूल्यों से दूर होता जा रहा है। मनुष्य तन पाकर भी उसमें वास्तविक गुणों का अभाव दृष्टिगोचर हो रहा है। शास्त्र हमारे सामने मनुष्य शब्द की अलग-अलग परिभाषाएं पेश करते हैं। यदि इन परिभाषाओं के अर्थों का विश्लेषण करें, तो हमें उक्त प्रश्नों का उत्तर अपने आप मिल जाएगा।
शास्त्रों में कहा गया मन्नात् इति मनुष्य अर्थात जो मनन करने की शक्ति से संपन्न है, वही मनुष्य है। मनन का प्रारंभ होता है अंतर से उत्पन्न हुई जिज्ञासा से। मनुष्य के मन में कुछ जानने की इच्छा उठी। इच्छा की तीव्रता ने मन को विचार करने पर विवश कर दिया और मनन का आरंभ हुआ। आज मनुष्य के भाग्य की विडंबना है कि उसमें जिज्ञासा तो उठती है परन्तु केवल बाहरी जगत के लिए। जब धार्मिक क्षेत्र की बात आती है तो वह उसे एक दम नीरस दिखाई पड़ता है। आश्चर्य की बात है कि मनुष्य इस संसार की विभिन्न वस्तुअाें एवं ऐश्वर्य के साधनों में तो पर्याप्त रुचि रखता है पर उसके अंतस में संसार के निर्माता को जानने की जिज्ञासा कभी उत्पन्न नहीं होती। यहां रविन्द्र कुमार, नरेश कुमार माैजूद रहे।
अमन नगर में कराई श्री शिव कथा, साध्वी ज्योत्सना भारती ने किए प्रवचन
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‘जो मनन करने की शक्ति से संपन्न है, वही मनुष्य है’
Reviewed by Dibyendu
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17:58
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