चंडीगढ़ (सुशील भार्गव).हरियाणा में पराली के अवशेष जलाने के मामले पिछले साल की अपेक्षा कम हुए हैं। जहां वर्ष 2018 मंे प्रदेश में किसानों ने 4589 जगहों पर पराली में आग लगाई थी, वहीं अबकी बार 25 सितंबर से 31 अक्टूबर तक करीब 37 दिनों मंे 4288 जगह लगी है। जबकि पड़ोसी राज्य पंजाब में 25 सितंबर से एक नवंबर तक 23152 जगहों पर फसल अवशेषों को आग लगाने की जगह चिहिन्त की गई है। हरियाणा के अधिकांश इलाकों में किसानों ने पराली बेची है।
जबकि कई ऐसे किसान अभी भी हैं जो पराली जलाना अपनी शान समझते हैं, ताकि गेहूं की बिजाई तेजी से कर सकें। प्रदेश में करीब 13.10 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई की गई थी, करीब 60 लाख टन धान मंडियों मंे भी पहुंच चुका है। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों का दावा है कि अबकी बार पिछले साल की अपेक्षा कम स्थानों पर पराली जलाई गई है, पंजाब में हरियाणा से अधिक पराली जलाने के मामले सामने आए हैं।
प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड हरियाणा के प्रिंसीपल साइंटिस्ट राजेश गाढ़िया ने बताया कि अबकी बार प्रदेश में करीब 4288 जगहों पर पराली जलाने की जगह चिहिन्त की गई हैं, जबकि पिछली बार यह आंकड़ा 4589 के करीब था। प्रदेश में करीब 10 फीसदी फसल अवशेष ही जल रहे हैं, जबकि नई दिल्ली में हरियाणा की वजह से प्रदूषण नहीं बढ़ा है। पंजाब में एक नवंबर त 23152 जगह फसल अवशेष जलाए गए हैं।प्रदूषण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नई दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने का कारण हरियाणा नहीं है। यहां पिछले साल की अपेक्षा कम पराली जलाने के मामले सामने आए हैं, जबकि पंजाब में आंकड़ा कहीं अधिक है।
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