सुनने में भले ही आपको यह बात अटपटी लग रही हो, लेकिन बठिंडा में 23 मार्च से कर्फ्यू शुरू होने के बाद पांच दिनों में शहर की करीब 8 से 10 छोटे व बड़े एनजीओ ग्रुप दिन रात शहर में जरूरतमंद लोगों के भूखे पेट में निवाला डालने को अपने परिवारों को भूल शहरवासियों से दान लेकर उन्हें सही जगहों पर पहुंचाने में जुटे हैं। हर एक एनजीओ अपने सामर्थ्य के अनुसार 100 से लेकर करीब 4500 लोगों को एक वक्त में भोजन बनाकर खिला रहा है जिसमें उनकी मदद शहर के कोने कोने में बैठे आमजन से धनाढ्य सभी तरह के लोग कर रहे हैं। ऐसा भी नहीं है कि यह एनजीओ मात्र दिखावे को जुटे हैं, एक रेस्टोरेंट की भांति यह ग्रुप अपनी तरफ से बेहतरीन खाना बनाकर रोजाना कम से कम दो समय जरूरतमंद लोगों तक पहुंचा रहे हैं। किसी ने तंदूर लगाया है तो किसी ने बड़ा तवा रखा हुआ है जिस पर एक बार में 1 हजार से 2 हजार रोटी उतर रही है। वहीं किसी ग्रुप में शामिल लोगों ने 30 से 40 घरों में परोंठे बना शहर में सड़कों पर गुजर रहे लोगों को पहले सेनेटाइजर से हाथ साफ करवा बड़े प्यार से आचार के साथ सर्व किए। संस्थाओं के मैन्यू में घर की मूंग दाल नहीं, बल्कि मिक्स मांह चना दाल, जीरा आलू, कढ़ी, फ्राइड राइस, आलू मटर, चना व पत्तागोभी सर्व किए जा रहे हैं जिसके साथ परांठा, तवा व तंदूरी रोटी का मैन्यू एनजीओ ने चलाया है जिसमें सेवा भाव से दिन से रात तक शहर की बेहतरीन रेस्टोरेंट चलाने वाली टीमें तक अपनी टीमों की निशुल्क सेवाएं इन एनजीओ को प्रदान कर रहे हैं। शहर में जरूरतमंद लोगों तक दो समय का भोजन पहुंचाने को जुटी संस्थाओं में जिम्मेदार लोगों का दिन सुबह 5 बजे शुरू हो जाता है। सुबह 10 बजे भोजन देने के लिए सुबह 5 बजे तैयारियां शुरू हो जाती हैं तथा रात को 12 बजे दिन खत्म होता है। एक बारगी में 100 से 4500 तक लोगों का भोजन बनाने को बहुत बड़े संसाधन व टीम की जरूरत है। ऐसे में कम से कम दो जगह दाल या सब्जी तो दो से तीन दूसरी जगहों पर रोटी पकाने का इंतजाम होता है जहां एक बार में एक से दो क्विंटल आटा तथा करीब इतना ही चावल लगना आम है। शहर की समाजसेवी संस्था में शामिल नौजवान वेलफेयर सोसायटी शहर में तीन से चार अलग-अलग जगहों पर भोजन बना रही है। सोनू महेश्वरी कहते हैं कि वह पिछले छह दिनों में दाल के साथ हर उस सब्जी को बनाने की कोशिश कर रहे हैं जो साफ सुथरा होने के साथ लोग चाव से खाएं जिसमें राशन की क्वालिटी से कोई समझौता नहीं है। वहीं सहारा जनसेवा के विजय गोयल कहते हैं कि सहारा जनसेवा जनता कर्फ्यू से अब तक सात दिनों में तवे की रोटी, दाल, आलू-मटर, आलू-चना, कढ़ी, आलू-सोयाबीन व चावल कढ़ी के अलावा चाय व ब्रेड का वितरण कर रही है तथा क्वालिटी एेसी है कि हमारी टीम भी यही खाना चखती है।
साफ व अच्छा भोजन देना मुख्य मकसद
आसरा वेलफेयर सोसायटी के प्रधान रमेश मेहता कहते हैं कि कर्फ्यू में चाय के साथ पिछले चार से पांच दिनों में ही करीब चार हजार से अधिक लोगों को सुबह व शाम का भोजन वितरित किया जा चुका है। इसमें दाल आदि के अलावा फ्राइड राइस, जीरा आलू, कढ़ी बनाया गया जिसमें स्वाद व सेहत को प्रमुखता दी गई। वहीं शाम को अलग-अलग मुहल्लों से रोटी भी बनकर आ रही है। आसरा से जुड़े सोशल वर्कर ग्रुप के सदस्य नरिंदर गोयल निंदी ने कहा कि पिछले करीब चार दिनों में सुबह व शाम भोजन बांटा जा रहा है। बैंगों के रमणीक वालिया कहते हैं कि दानी सज्जनों के सहयोग बैंगों ने दाल, सब्जी व रोटी का वितरण किया है। जिसमें सेहत से कोई समझौता नहीं किया गया। वहीं नीलकंठ महादेव वेलफेयर ट्रस्ट के महासचिव मनोज जैन ने कहा कि सुबह चाय के बाद पूरी, चपाती, दाल, आलू, घीया दाल, खिचड़ी व चावल करीब रोजाना 1400 लोगों को दिया जा रहा है जिसमें संस्था की कोशिश साफ व अच्छा भोजन देने की रही है। वहीं साथी वेलफेयर सोसायटी के जतिंद्र गोगिया व रविकांत कहते हैं कि पिछले 6 दिनों से सुबह का खाना व चाय बनाकर सर्व कर रहे हैं। इसमें रोटी, आलू की सब्जी व कढ़ी चावल का वितरण किया गया। उनका कहना है कि एक ही एरिया में आपरेट कर रही उनकी संस्था का मुख्य टारगेट सेहत व स्वाद ही है, जबकि शाम का भोजन उन्हें बैंगों मुहैया करवाती है।
}दाल रोटी, जीरा आलू, कढ़ी, आलू मटर, चना, फ्राइड राइस, परांठा, तवा व तंदूरी रोटी मैन्यू कार्ड
}सुबह 5 से लेकर रात 12 बजे तक चलता है काम
बठिंडा में जरूरतमंद लोगों के लिए लंगर तैयार करते हुए नाैजवान वेलफेयर साेसायटी के सदस्य व अन्य।
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लोगों तक शुद्ध भोजन पहुंचाने में जुटे एनजीओ
Reviewed by Dibyendu
on
19:10
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