कोरोना वायरस के कारण देशभर में लॉकडाउन है। लोगों को घरों से बाहर निकलने की इजाजत नहीं। इसका सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी कर अपने परिवारों का पेट पालने वालों पर हो रहा है। ऐसे ही कुछ लोग शेरपुर और आसपास के इलाकों में रहते हैं, जहां पर लोगों की जिंदगी का कर्फ्यू लग गया है। हालात इतने खराब हैं कि लोग खराब अनाज खाने को मजबूर हैं तो किसी ने एक हफ्ते से रोटी नहीं खाई। सरकार के लोगों तक राशन पहुंचाने के बारे में जानने के लिए दैनिक भास्कर ने शेरपुर का दौरा किया। जहां पर लोग भुखमरी का शिकार हो रहे हैं। इलाकावासी प्रभा ने बताया कि शेरपुर में 550 के करीब वेहड़े हैं, इनमें 5 हजार से अधिक मजदूर रहते हैं। हर करियाना दुकान पर 250 रुपए की आटे की थैली 500 रुपए में बिक रही है। हर चीज का दाम दोगुना है। 10 का दूध 25 रुपए में बेच रहे हैं। लोगों का कहना है कि उनकी सार तक लेने कोई नहीं आया। हलका विधायक और इलाका कौंसलर ने भी इनकी कोई सुध नहीं ली। इनकी तीन जरूरतें राशन, दवा और किराया हैं। कई मकान मालिक तो पुराना किराया भी मांग रहे हैं।
पढ़िए इनकी व्यथा...पति कैंसर पीड़ित और प|ी लोगों से मांगकर भर रही बच्चों का पेट
गरीबों की जिंदगी पर लगा कोरोना कर्फ्यू
लॉकडाउन के कारण आ रही दिक्कतों के बारे में जानकारी देते शेरपुर के लोग।
शीला देवी ने अनुसार पति को 9 महीने पहले कैंसर हो गया। पहले कुछ महीने देवर ने राशन के पैसे दिए, लेकिन फिर बंद किए तो पास में जमा रखे पैसों से खर्च चलाया। मगर वह भी खत्म हो गए। एक हफ्ते से रोटी नहीं खाई। अब लोगों से मांगकर एक समय बच्चों को रोटी दे रही हूं। खुद दो दिन में एक समय खाना खाती हूं। बीमार पति की दवाई भी नहीं है। हम अंदर ही मर रहे हैं।
आलू और खराब आटे की रोटी खा रहे: बलजीत कौर (50) ने बताया कि उनके दो बेटे, एक बेटी है। पति की मौत हो चुकी है। घर पर 500 रुपए थे। उससे आलू समेत तेल और अन्य सामान लिया। पिछले एक हफ्ते से एक टाइम आलू की सब्जी बनती है। घर पर कुछ खराब आटा मिला। कमबख्त पेट के लिए उसकी रोटी बनाकर खानी पड़ रही है। रात को सिर्फ पानी पीकर सोते हैं। नेता चुनाव में तो आए, मगर अब कहां ंगायब हो गए।
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शेरपुर में आटा थैली ~500 में बिक रही, कोई खराब अनाज खा रहा तो कुछ मांगने को मजबूर
Reviewed by Dibyendu
on
19:37
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