30 जून तक भर सकते हैं फरवरी, मार्च, अप्रैल की रिटर्न
लॉक डाउन की स्थिति में जीएसटी टैक्स पेयर को सहूलियतें दी गई हैं। इसके तहत 5 करोड़ तक की सालाना टर्नओवर वाले करदाताओं को अब फरवरी, मार्च और अप्रैल की सभी रिटर्न्स, जीएसटी 3बी, जीएसटीआर-1, अब 30 जून 2020 तक भरी जा सकती हैं। लेट फीस, पेनेल्टी या इंटरेस्ट नहीं लगेगा। 5 करोड से अधिक टर्नओवर वाले करदाताओं को भी लेट फीस और पेनल्टी से राहत है, परंतु इंटरेस्ट में उन्हें 15 दिन की छूट दी गई है। फिर उन्हें 18% की बजाय 9% इंटरेस्ट ही देना होगा। वह भी उस स्थिति में यदि उनकी कैश लायबिलिटी बनती होगी। इसी प्रकार जो कंपोजिशन डीलर हैं, उनकी मार्च क्वार्टर की रिटर्न फाइल करने की तारीख 30 जून तक बढ़ा दी गई है। साथ ही कंपोजिशन स्कीम में जाने के लिए जून 2020 तक फॉर्म भरा जा सकता है। सबका विश्वास स्कीम के तहत अब टैक्स का भुगतान 30 जून तक बिना किसी इंटरेस्ट के किया जा सकता है। वर्ष 2018-19 की जीएसटी एनुअल रिटर्न की डेट 31 मार्च से बढ़ा कर 30 जून कर दी गई। इन सबके अलावा जो भी कोई समय सीमा 20 मार्च से 30 जून के बीच समाप्त हो रही है उसे 30 जून तक बढ़ा दिया गया है। इसमें कोई नोटिस, आर्डर, अपील आदि को शामिल किया गया है, जोकि जीएसटी के ऑफिसर्स के लिए एक छूट है।
सीए मोहित सोई, सेक्रेटरी, इनडायरेक्ट टैक्सेस कंसल्टेंट्स एसोसिएशन
}अपने सवाल हमें बताएं: जीएसटी की उलझन है या रिटर्न फाइलिंग से जुड़ा कोई सवाल, हमें बताएं-8770590208 पर व्हाट्सएप या news.ludhiana@dbcorp.in पर मेल कीजिए। सवाल के साथ अपना और शहर का नाम जरूर लिखें। कारोबारी अपने सवाल भास्कर के फेसबुक पेज DainikBhaskarPunjab पर जाकर इनबॉक्स में मैसेज के जरिए भी पूछ सकते हैं। एक्सपर्ट के जवाब, सुझाव व समाधान इसी कॉलम के तहत प्रकाशित किए जाएंगे हर रविवार...।
भास्कर एक्सपर्ट
? मेरा मैं एक रजिस्टर्ड जीएसटी डीलर हूं। मैं रेगुलर डीलर से कंपोजिशन डीलर में कन्वर्ट होना चाहता हूं। क्या मुझे स्टॉक पर टैक्स देना पड़ेगा? क्या मेरा इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में बचा हुआ आईटीसी मेरी नई रजिस्ट्रेशन में ट्रांसफर हो जाएगा। -ललित गुप्ता, कारोबारी, लुधियाना
{यदि आप नॉर्मल टैक्स डीलर से कंपोजिशन स्कीम में शिफ्ट करते हैं तो आपको उस दिन तक के स्टॉक पर लिए इंपोर्ट टैक्स क्रेडिट जितना जीएसटी जमा करवाना पड़ेगा। यदि आपकी इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में कोई बैलेंस पड़ा है तो वह आपको नई स्कीम में नहीं मिलेगा और वह लैप्स हो जाएगा।
? मैंने जीएसटी लगने के बाद एक मशीन खरीदी थी। मैंने उस पर जीएसटी का आईटीसी ले लिया था। अब मैं उस मशीन को बेचना चाहता हूं। क्या मुझे मशीन को बेचने पर जीएसटी लगेगा? यदि लगेगा तो कितना? वैभव मिंगलानी करें? -वैभव मिंगलानी
{आपके मशीन बेचने से पहले उस मशीन की बची लाइफ (जीवन अवधि) देखनी होगी और उस पर लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट को प्रोराटा बेसिस पर शेष जीवन अवधि का इनपुट टैक्स क्रेडिट निकालना होगा, और उसको मशीन की बिक्री मूल्य पर लगते जीएसटी के साथ कंपेयर करना होगा। आपको दोनों में से जो रकम ज्यादा है, उसे जीएसटी के रूप में देना होगा। इसे हम ऐसे समझ सकते हैं-
मान लीजिए आप ने एक मशीन 50 हजार में खरीदी और उस पर 18% जीएसटी यानी 9 हजार जीएसटी के रूप में दिया और वो जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में क्लेम कर लिया। उस मशीन की जीवन अवधि 60 महीने की है। अब आपने उस मशीन को 55 महीने के बाद 4 हजार में बेच दिया। अब उस मशीन की 5 महीने की शेष जीवन अवधि के हिसाब से 750 रुपए आईटीसी होगा। (9000×5÷60) जबकि मशीन की बिक्री मूल्य के हिसाब से जीएसटी 720 रुपए होगा। (4000×18%) । आपको उस मशीन पर 750 रुपए जीएसटी देना पड़ेगा।
भास्कर जीएसटी गाइड
अप्रैल से जीएसटी रिटर्न के नियम बदल रहे हैं। ऐसे में दैनिक भास्कर में पढ़िए-‘जीएसटी गाइड: सवाल आपका, समाधान हमारा’। जीएसटी या रिटर्न से जुड़ी दिक्कतें हमें बताएं, हमारे एक्सपर्ट देंगे जवाब। हर रविवार इसी कॉलम के तहत।
सीए सुमीर गुप्ता मेंबर, इनडायरेक्ट टैक्सेस कंसल्टेंट्स एसोसिएशन व डिस्ट्रिक्ट टेक्सेशन बार एसो.
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नॉर्मल से कंपोजिशन स्कीम में शिफ्ट करने पर इलेक्ट्रॉनिक क्रेिडट लेजर बैलेंस लैप्स होगा
Reviewed by Dibyendu
on
19:37
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