करीब आठ दिन से निर्दोष होने के बावजूद जेल में बैठे पीड़ित सुमित के परिवार के सब्र का बांध टूट गया। क्योंकि सुबह शाम थाने के चक्कर लगाने और परेशान होने के बाद भी उनका बेटा नहीं छूटा, जिसे सेंट्रल जेल भेज दिया गया।
उधर, असली आरोपी सुधीर को पुलिस सोमवार को कोर्ट में पेश करेगी। जहां पता चलेगा कि अदालत पीड़ित परिवार द्वारा दायर की सुमित की बेगुनाही पर क्या जवाब देती है? मां सीमा ने बताया कि पिछले आठ दिनों से परिवार ढंग से सोया नहीं है। उन्होंने तो पिछले तीन दिन से खाना ही नहीं खाया।
भाई प्रकाश ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि कोई अपराध न करना भी गुनाह है। अगर उनके भाई ने कोई गुनाह किया होता और वो जेल में होता तो उन्हें दुख न होता। लेकिन जिसने कुछ किया ही नहीं और बिना किसी क्राइम के सजा काट रहा है।
अब तक ऐसे चला मामला
हरबंसपुरा में राकेश यादव ने आत्महत्या की। पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें आरोपियों में सुमित का नाम लिखा था। राकेश की पत्नी रिया को पुलिस थाने ले आई। जब रिया की एक साल की बच्ची को रिश्तेदार सुमित दूध देने आया तो उसे आरोपी समझकर पुलिस ने पकड़ा और कोर्ट में पेश कर दिया। जिसे जेल भेज दिया गया। तभी सुमित के परिवार ने असली आरोपी सुधीर उर्फ सुमित पकड़कर दिया।
जिसके बाद अधिकारियों ने मामले की जांच की तो पता चला कि रिया और सुधीर के प्रेम संबंध थे। लेकिन राकेश को सुधीर का नाम सुमित बताया गया था। जिसके बारे में राकेश को पता चला तो उसने सुसाइड नोट में सुमित व चार अन्य आरोपियों का नाम लिखकर आत्महत्या कर ली। उधर, निर्दोष सुमित के परिजनों ने एक एप्लीकेशन पुलिस को लिखकर दी कि उनका बेटा निर्दोष है।
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