एचएसवीपी अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज, एमडीसी सेक्टर-6 में प्लॉट अलॉटमेंट में फर्जी दस्तावेज देनेे का मामला
एमडीसी सेक्टर-6 में प्लॉट के नाम पर फर्जीवाड़ा करने के मामले में भी डबल प्लॉट अलॉटमेंट की तर्ज पर पूरी योजना के साथ काम किया गया। जैसे डबल प्लॉट अलॉटमेंट मामले में ज्यादातर आरोपियों ने इन विवादित प्लॉट्स को आगे ट्रांसफर कर उस प्लॉट को बचाया है।
वहीं, इस प्लॉट मालिक ने भी ऐसे ही एचएसवीपी की आंखों में धूल झोंकी है। क्योंकि आरोपी वरूण गोयल के नाम पर अगर ये प्लॉट होता तो एचएसवीपी इसे जब्त कर सकता था। लेकिन उसने इसी बात से बचाव करने के लिए प्लॉट को आगे ट्रांसफर कर दिया। वहीं, अब जांच शुरू होने के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
जिसमें सामने आया कि पहली अलॉटमेंट के दौरान वरूण की एचएसवीपी ऑफिस में ऐसी सांठगांठ थी कि उसने राशन कार्ड के अलावा कोई भी लीगल डॉक्यूमेंट्स जमा ही नहीं करवाया था। उसके बाद उसके लेटर पर प्लॉट ही ट्रांसफर कर दिया गया। एचएसवीपी इस प्लॉट को लेकर हुए फर्जीवाड़े की शिकायत के बाद इसे रिज्यूम कर सकता था।
एचएसवीपी की पॉलिसी के अनुसार इसका अधिकार भी उसके पास था, लेकिन आरोपी ने अलॉटमेंट के साथ ही इस प्लॉट को किसी अन्य के नाम पर ट्रांसफर कर दिया। उसके बाद लगातार कई लोगों के नाम पर इस प्लॉट को सिर्फ इसलिए ट्रांसफर करवाया गया, ताकि इसे बचाया जा सकें। एमडीसी पंचकूला का सबसे पॉश एरिया है, जहां पर प्लॉट का ड्रॉ में निकल आना, किसी लॉटरी से कम नहीं है। ऐसे में उसने एचएसवीपी में पूरे डॉक्यूमेंट्स जमा ही नहीं करवाए थे।
क्या है मामला...एचएसवीपी की पॉलिसी के अनुसार 20 साल से कम उम्र का कोई भी व्यक्ति या महिला किसी ऑक्शन और ड्रॉ में भाग नहीं ले सकता है। लेकिन यहां एमडीसी सेक्टर 6 के प्लॉट नंबर 162 को वरूण गाेयल नाम के आरोपी के नाम पर उस समय अलॉट किया गया, जब उसकी उम्र कम थी। उसके बाद भी वरूण के नाम पर प्लॉट अलॉट किया गया।
इस दौरान जब वरूण ने पहली बार एप्लीकेशन देकर जुलाई 2006 में एचएसवीपी को कहा था, तो उसने नोटरी से अटेस्टेड एक राशन कार्ड की कॉपी डॉक्यूमेंट्स में लगाई थी। जिसमें सामने आया था कि 2005 में उसकी उम्र 22 साल थी। वहीं प्लॉट को बचाने के लिए वरूण ने अलॉटमेंट के तुरंत बाद इसे दूसरे के नाम पर ट्रांस्फर कर दिया गया था।
एचएसवीपी में सेटिंग, अधिकारियों की होगी जांच
पहले एचएसवीपी की ओर से जांच नहीं की गई थी। जिसके बाद मामला कमिश्नर के पास गया। जहां से अब एफआईआर के ऑर्डर दिए गए हैं। ऐसे में जब प्लॉट की पहली अलॉटमेंट की गई थी तो उस दौरान वरूण ने पूरे डॉक्यूमेंट्स ही नहीं दिए थे। जो राशन कार्ड दिया उसमें वरूण की उम्र के बारे में पूरी जानकारी मिल रही थी। लेकिन उसे नजरअंदाज किया गया।
ऐसे में अब पुलिस और एचएसवीपी की ओर इस एंगल पर भी जांच की जा रही है। जिसके चलते उस दौरान के अधिकारियों से पूछताछ की जाएगी। वहीं सेटिंग करने वाले अधिकारियों पर गाज भी गिर सकती है।
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