केंद्र सरकार द्वारा किसानों को लेकर पारित किए गए कृषि कानूनों के विरोध में बुधवार को फाजिल्का-अबोहर मार्ग पर गांव घल्लू के समीप सुबह 11 से 12 बजे तक रोष धरना दिया गया। गांव घल्लू में लगाए गए धरने में फाजिल्का के पूर्व विधायक डॉ. महेन्द्र रिणवा ने कृषि सुधार बिल को काला कानून बताते इसे केंद्र सरकार के पतन का आधार बता दिया।
उन्होंने कहा कि बिहार और उत्तर प्रदेश में भी किसानों की उपज की सरकारी खरीद न होने और न्यूनतम समर्थन मूल्य न होने से वहां के किसान अपनी उपज कारपोरेट घरानों को कम भाव पर बेचने पर मजबूर हैं। केवल पंजाब और हरियाणा में ही विश्व का सबसे मजबूत मंडीकरण सिस्टम एमएसपी और सरकारी खरीद के सहारे चल रहा था लेकिन सरकार यहां भी उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे हालात पैदा करना चाह रही है।
केंद्र सरकार ने पंजाब और हरियाणा के किसानों को बर्बाद करने का कानून बनाया : सिद्धार्थ रिणवा
अपने कानूनों को सही साबित करने के लिए भले ही एकबार पीएम मोदी के उद्यमी मित्र पंजाब में एक-दो साल फसलों के दोगुने भाव दे देंगे लेकिन आखिरकार हालात किसानों को बड़ी कंपनियों का गुलाम बनाने वाले होंगे। डॉ. महिंदर रिणवा ने बताया कि पंजाब का किसान सारे देश का पेट भरता है और उसके विरुद्ध केन्द्र की मोदी सरकार ने काला कानून पास किया है।
इसका वह विरोध करते हैं और पंजाब भाजपा को चैलेंज करते हैं कि किसी भी मंच पर किसानों के लिए इस काले कानून पर बहस के लिए तैयार हैं। उन्होंने फाजिल्का के पूर्व विधायक व पंजाब के पूर्व भाजपा स्वास्थ्य मंत्री को आड़े हाथों लेते हुए कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि वह एक लीडर होने से पहले एक किसान हैं व किसानों के हितों के लिए उन्हें ही भाजपा छोड़ आगे आना चाहिए।
वहीं डॉ. रिणवा के पुत्र एवं जिला परिषद सदस्य सिद्धार्थ रिणवा ने उपस्थिति को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने कोरोना की आड़ में पंजाब और हरियाणा के किसानों को बर्बाद करने का कानून बनाया है लेकिन यहां का किसान जुझारू और अपने अधिकारों के लिए मर मिटने वाला है, इसलिए पूरे पंजाब और देश के हर कोने का किसान केंद्र सरकार के खिलाफ संघर्ष छेड़ चुका है और इस काले कानूनों को वापस करवाकर ही दम लेगा।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3l2M8De
via
No comments: