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कृषि कानूनों के विरोध में अब 2 अक्टूबर तक ट्रेनें रोकेंगे किसान, अमृतसर में 5000 युवा मैदान में, संभाला आंदाेलन का माेर्चा, मुक्तसर में नेताओं के पोस्टरों पर पोती कालिख

कृषि बिलों पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद किसानों का गुस्सा और बढ़ता दिख रहा है। अब इनके आंदोलन में युवा, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हो रहे हैं। सोमवार को अमृतसर, फिरोजपुर, मुक्तसर, कपूरथला, बटाला और फगवाड़ा में प्रदर्शन हुए। यहां लोगों का कृषि कानूनों के खिलाफ लोगों का गुस्सा चरम पर दिखा। अमृतसर में सोमवार को किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के बैनर तले जंडियाला गुरु के देवीदासपुरा रेलवे फाटक पर धरने में 5वें दिन 5000 से ज्यादा नाैजवान भी शामिल हाे गए।

युवाओं ने पहले शहीद भगत सिंह की जयंती पर उनकाे नमन करके माेदी सरकार के खिलाफ 1 अक्टूबर से देशव्यापी आंदाेलन छेड़ने का एलान किया। किसान नेताओं ने रेल राेकाे आंदाेलन काे 29 को समाप्त न करने और इसे 2 अक्टूबर तक जारी रखने का एलान किया। बस्ती टैंका वाली फिरोजपुर से आंदोलन में पहुंचे युवाओं ने कहा कि कृषि सेक्टर में कॉर्पोरेट घरानों का कब्जा नहीं होने देंगे।

शहीद भगत सिंह ने देश के लिए जो सपना देखा था, उसको स्थापित करेंगे। किसान विरोधी हर तरह की नीतियों को निरस्त करवाकर ही वह मांनेंगे। किसान मजदूर संघर्ष यूनियन के जनरल सेक्रेटरी सरवन सिंह पंधेर, उप-प्रधान सविंदर सिंह चुताला आदि नेताओं ने कहा कि शहीद भगत सिंह का जन्मदिवस है, जाे युवाओं को न्याय के लिए कभी भी पीछे नहीं हटने की सीख देता है। बहरी हो चुकी मोदी सरकार को किसानों की आवाज सुनाई नहीं दे रही, इसलिए आंदोलन 29 सितंबर को खत्म नहीं होगा, अभी यह लड़ाई लंबी लड़ी जानी है।

जत्थेबंदियाें ने कृषि बिलाें पर राष्ट्रपति की ओर से हस्ताक्षर किए जाने काे लेकर युवाओं और धरने दे रहे किसानाें भारी गुस्सा पाया गया। किसानों ने इस दिन काे इतिहास का काला दिवस मनाने की बात कही। उधर, फिरोजपुर में रैली का आयोजन किया गया जिसमें सैकड़ों महिलाएं पहुंचीं। महिलाओं ने कहा कि राजनेता किसानों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। किसान मर रहे हैं। इन्हें इसकी चिंता नहीं है। अपनी राजनीति चमकाने में लगे हैं। इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।

नौजवान बोले- नेताओं को दिख रहा 2022 का विस चुनाव, जो किसानों का नहीं, वाे हमारे नहीं

गांव कोटली अबलू के नौजवानों ने रोष मार्च निकाला और मुक्तसर में लगे सियासी नेताओं के पोस्टरों पर कालिख पोती। युवा बोले- पंजाब में सभी सियासी पार्टियाें को 2022 का विधानसभा चुनाव दिख रहा है। इसलिए किसानों की हमदर्द बनने का नाटक कर रही हैं। जो पार्टी या नेता किसानों के साथ नहीं वो हमारे नहीं।

राष्ट्रपति का पुतला फूंका, बोले- नोटबंदी के बाद जीएसटी और अब कृषि कानून, सबक सिखाएंगे

बिलों पर हस्ताक्षर के विरोध में कीर्ति किसान यूनियन ने गांव जोगानंद में राष्ट्रपति का पुतला फूंका। किसानों ने कहा- जब से मोदी सरकार आई है, कार्पोरेट पक्षीय नीतियां अपना रही है। नोटबंदी ने कारोबार बंद कर दिए, जीएसटी लगा गला घोंटने की कोशिश की हुई। अब किसान विरोधी कानून ले आए। समय पर सबक सिखाएंगे।

किसानों का रोष देख शिअद ने लिया था यूटर्न बादल समझ गए थे, बेस खिसक रहा है : बाजवा

पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल अगर कैबिनेट में कृषि बिल एजेंडा आइटम लाए जाने वाले दिन ही इस्तीफा देतीं तो भाजपा इसे पास न कर पाती। पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल और हरसिमरत कौर ने भाजपा से यह ड्यूटी ली थी कि किसानों को संभालना और समझाना उनका काम है। वे लोग किसानों की जमात हैं और उन्हें समझा देंगे।

वहीं जब बादल परिवार ने किसानों का बढ़ता हुआ रोष देखा तो यू-टर्न ले लिया। यह बातें राज्यसभा मेंबर प्रताप सिंह बाजवा ने सोमवार को कहीं। इससे पहले उन्होंने राज्यसभा मेंबर शमशेर सिंह दूलो के साथ मिलकर गोल्डन टैंपल में माथा टेका।

बाजवा और दूलो किसानों की चढ़दी कला और कोरोना में पंजाबियों की सुख-शांति के लिए रखवाए पाठ के भोग में शामिल होकर वाहेगुरु के आगे अरदास करने पहुंचे थे। बाजवा ने कहा कि हरसिमरत का इस्तीफा और भाजपा से गठबंधन तोड़ना शिअद की मजबूरी थी। किसानों का रोष देख बादल परिवार समझ गया था कि किसानों के बीच उनका राजनीतिक बेस खत्म हो जाएगा।

कानून के विरोध में चुनाव में प्रतिनिधि उतारें किसान : सिद्धू

पूर्व कैबिनेट मंत्री और विधायक नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि भाजपा सरकार ने पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए किसान विरोधी बिल पास किए हैं। इसलिए किसानों को चाहिए कि वह किसान प्रतिनिधियों को चुनावों में उतारें। ताकि वह किसानों की आवाज सरकार तक पहुंचा सकें। पंजाब की किसानी वह किसानी है जहां बाबा नानक ने खुद हल जोता था। सिद्धू गांव मानावाला में पूर्व विधायक धनवंत सिंह मान की अगुआई में कृषि विधेयकों के खिलाफ समागम में पहुंचे थे।

विरोध नहीं नूरा-कुश्ती कर रहे कांग्रेस-अकाली: संधवा

आप विधायक कुलतार सिंह संधवां ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस भी बादल परिवार की तरह मोदी के साथ नूरा-कुश्ती खेल रही है। जबकि जिस तानाशाही के साथ भाजपा ने कृषि कानून थोपे हैं, उसके खिलाफ सरकार और बादलों को उसी दिन से डटना चाहिए था, जब कृषि अध्यादेशों का खाका तैयार हो रहा था।

शिअद हमेशा ही किसानों के साथ रहा और रहेगा: सुखबीर

शिअद प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि किसानों की लड़ाई में शिअद हमेशा उनके साथ है और रहेगा। किसानों को इंसाफ मिलने तक पार्टी चुप नहीं बैठेंगे। कॉर्डिनेटर भी नियुक्त किए हैं जो जो बड़े स्तर पर किसानों को मार्च में शामिल करेंगे और केंद्र सरकार पर कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए दबाव बनाएंगे।



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Farmers will now stop trains till October 2 in protest against agricultural laws, 5000 youths in Amritsar, handle Andelan's rally, soak grandchildren on posters of leaders in Muktsar


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कृषि कानूनों के विरोध में अब 2 अक्टूबर तक ट्रेनें रोकेंगे किसान, अमृतसर में 5000 युवा मैदान में, संभाला आंदाेलन का माेर्चा, मुक्तसर में नेताओं के पोस्टरों पर पोती कालिख कृषि कानूनों के विरोध में अब 2 अक्टूबर तक ट्रेनें रोकेंगे किसान, अमृतसर में 5000 युवा मैदान में, संभाला आंदाेलन का माेर्चा, मुक्तसर में नेताओं के पोस्टरों पर पोती कालिख Reviewed by Dibyendu on 18:09 Rating: 5

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