जल सप्लाई व सैनिटेशन विभाग में कॉन्ट्रैक्ट पर अलग-अलग ठेकेदारों कंपनियों, सोसायटियों आदि जरिए पेंडू जल घरों में अपनी सेवाएं दे रहे कॉन्ट्रैक्ट वर्करों को वेतन दे रहे पहले वाले 02 वेवज 2215 हेड को बदल कर 27 माइनर वर्क हेड में से वेतन देने के फैसले के विरोध व अन्य मांगों के संबंध में कॉन्ट्रैक्ट वर्करों की ओर से इस फैसले की कापियां जलाकर जिला होशियारपुर के अलग-अलग गांवों में राज्य सरकार खिलाफ रोष प्रदर्शन किया गया। संघर्ष जत्थेबंदी जल सप्लाई व सेनिटेशन कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन रजि-31 पंजाब की राज्य कमेटी के सद्दे पर किए गए इस रोष प्रदर्शन दौरान समूह वर्करों ने अपने-अपने घरों की छतों पर चढ़कर हाथों में प्रदर्शन वाले बैनर पकड़कर सरकार के इस मुलाजिम मारू फैसले का विरोध किया गया|
इस मौके प्रेस बयान जारी करते हुए जत्थेबंदी के राज्य आगू ओंकार सिंह ढाडा, जिला प्रधान जतिंदर बधन, ब्रांच प्रधान सुखविंदर सिंह चुंबर और जिला खजांची कुलदीप सिंह सैनी ने बताया कि कॉन्ट्रेक्ट वर्करों को 02 विशेष 2215 हेड को बदलकर मार्च महीने से 27 माइनर वर्क हेड ठेकेदार वाले हेड में से वेतन दिया गया है जिस कारण समूह जत्थेबंदी की ओर से 26 अप्रैल से 30 अप्रैल तक संघर्ष किया जा रहा था। आज संघर्ष के आखिरी दिन समूह वर्करों ने अपने-अपने परिवारों समेत छतों पर चढ़कर और इस फैसले की कापियां जलाकर रोष प्रदर्शन किया| इस मौके उन्होंने कहा कि पिछले 10-12 सालों से जल सप्लाई विभाग में ठेका आधारित सेवाएं दे रहे निगुने वेतन के बदले इमरजेंसी के हालातों में भी तनदेही से ड्यूटी करने वाले मुलाजिमों को वेतन 2215 के आधार पर वेतन दिया जाए।
इसके अलावा वर्करों को विभाग में शामिल करके रेगुलर किया जाए, वर्तमान हालातों के दौरान वर्करों के ड्यूटी दौरान बचाव के लिए पीपीई किटे, मास्क, सेनिटाईजर, व दस्ताने दिए जाएं, किरत कानून तहत हफ्तावारी रेस्ट या ओवर टाइम का भत्ता दिया जाए, 50 लाख रुपए का वर्कर का बीमा और परिवार का मुफ्त इलाज किया जाए, अगर कोरोना के दौरान ड्यूटी दौरान वर्कर की मौत हो जताई है तो उसके परिवार को एक करोड़ रुपए व सरकारी नौकरी दी जाए, वर्करों को 24 घंटे ड्यूटी करने बदले बोनस या मान भत्ता दिया जाए नहीं तो जत्थेबंदी की ओर से यह संघर्ष जारी रखा जाएगा|
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