डेराबस्सी शहर के दादपुरा मोहल्ले में लॉकडाउन के दौरान पहुंची एक बारात दुल्हन की डोली वाली कार में ही सिमट गई। केवल पांच लोग बारात में पहुंचे जिनका स्वागत घर में घुसने से पहले सेनेटाइजर से किया गया। वर व वधू पक्ष के अलावा फेरे कराने वाले पंडित भी मास्क लगाए हुए थे।दोनों पक्षों को लॉकडाउन इतना रास आया कि उन्होंने इसके खुलने या इसमें राहत मिलने का भी इंतजार नहीं किया। बेहद सादे समारोह के कारण दोनों परिवार लाखों रुपए की फिजूलखर्ची से बचने की खुशी से सराबोर हैं।
रोपड़ जिले के धनोरी गांव से विशाल वर्मा पुत्र सतीश वर्मा की पांच लोगों की बारात दीपिका वर्मा पुत्री राजेश वर्मा के घर रविवार सुबह पहुंची। बेहद सादे रीति रिवाज में दोनों परिणय सूत्र में बंध गए। हलांकि शादी करीब दो महीने पहले तय हो गई थी परंतु इससे पहले कि कार्ड छपते और पैलेस इत्यादि बुक होते, तैयारियां लॉकडाउन का शिकार हुई। विशाल व दीपिका ग्रेजुएट हैं।
दाेनों व उनके परिवार शादी मुहूर्त पोस्टपोन न करने पर बजिद हो गए। यही वजह रही कि उनके विवाह में रिश्तेदार, दोस्त समेत मेहमान जहां नदारद हुए, वहीं सिट्ठनियां, डीजे, ढोल, टैंट, घोड़ी, बैंड के शोर के साथ हलवाई, कॉकटेल और मॉकटेल पूरी तरह गायब थी। बस यादगार बनाने के लिए फोटो व मूवीमेकर जरूर था। काेरोना खौफ में बारात भी सेनेटाइजर व मास्क से लैस होकर आई, वहीं उसका स्वागत भी सेनेटाइजर्स से ही किया गया। विशाल वर्मा के अनुसार बारात में केवल उसके साथ माता पिता, भाई व ड्राइवर थे।
वापिसी में उनकी पत्नी भी इसी कार में वापिस लौटीं। विशाल ने कहा कि उसके रिश्तेदार और यार दोस्तों की अाेर से शिरकत न कर पाने का उन्हें अफसोस है। लेकिन साथ ही खुशी भी है कि इससे दोनों परिवारों का काफी खर्चा बच गया। उन्होंने कहा कि न तो दोनों परिवार के लिए शादी का खर्च बोझ बना, न ही कोई परिवार कर्जायी हुआ। वर वधू और दोनों परिवार खुश हैं। वह समाज को संदेश भी देना चाहते हैं कि शादी समेत जश्न समारोह फिजूल खर्ची की बजाय सादे ढंग से मनाने चाहिए। यही वजह है कि उन्होंने शादी की तारीख आगे नहीं की बल्कि उनकी साेच के मुताबिक लॉकडाउन उन्हें खूब रास आया है।
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