पिंजौर-कालका मेन रोड पर वैसे ही ट्रैफिक ज्यादा होने से जाम की समस्या रहती है। अब इस समस्या को रोड पर घूमने वाले लावारिस पशु (गाय व सांड) बढ़ा रहे हैं। पिंजौर खाकीशाह मंलग पीर से लेकर परवाणू बैरियर तक मेन रोड पर दर्जनों पशु घूमते रहते हैं। अधिकतर ये मवेशी रोड किनारे लगे गंदगी के ढेरों व डस्टबिन के आसपास पड़ी गंदगी में मुंह मारते नजर आते हैं।
पशु पिंजौर टी पॉइंट के डिवाइडर पर भी बैठे रहते हैं। आवारा मवेशी जहां एक ओर यातायात प्रभावित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मेन रोड पर चलने वाले वाहन सवाराें के लिए भी खतरा बन जाते हैं। पिंजौर से कालका तक रास्ते में रोड किनारे करीब आधा दर्जन जगहों पर डस्टबिन पड़े हैं, जिनके आसपास हमेशा गंदगी पड़ी रहती है, वहीं पर मवेशी में मुंह मारते रहते हैं। मवेशियों की संख्या इतनी ज्यादा होती है कि वे सड़क पर भी झुंड बनाकर खड़े हो जाते है। पिंजौर-कालका क्षेत्र में करीब आधा दर्जन गऊशालाएं हैं, इसके बावजूद भी यहां पर दर्जनों आवारा गाय व सांड सड़क में घूम रहे हैं। क्षेत्र में पिंजौर, कालका में दो बड़ी गऊशालाएं हैं, जहां पर सैकड़ों गाय हैं।
इसके अलावा विराटनगर आश्रम, गरीड़ा, मढ़ावाला, रामनगर में भी गऊशालाएं हैं। आवारा घूमती गाय से लोगों को हर समय खतरा रहता है। हालांकि, इनकी चपेट में आने से अकसर लोग घायल भी हो रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई गाय व सांड ऐसे हैं, जिनके कान में टैग भी लगा हुआ है इससे यह लगता है कि वे गऊशाला से निकलकर आबादी में आवारा घूम रही हैं। पिंजौर कामधेनु गउशाला के सेवादार सुरिन्द्र छिंदा ने बताया कि गऊशालाओं को रेगुलर सरकारी मदद नहीं मिल पा रही है। कमेटी के पदाधिकारी व आसपास के दानी लोगों की मदद से गऊशालाएं चल रही हैं। यहां 1100 गाय रखने की क्षमता है जबकि यहां पर 1350 गाय व सांड रखे हुए हैं।
घायल गाय को ही अब रख सकते हैं। क्षेत्र की गोशाला कमेटी के सदस्यों ने बताया कि चंडीगढ़ व आसपास क्षेत्र में जितने भी कैटल पाउंड है वहां पर ज्यादा गाय व सांड होने पर वो रात को चोरी छिपे पिंजौर-कालका क्षेत्र में छोड़ जाते हैं। इसके चलते ही यहां लावारिस पशुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।
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