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न्यूयॉर्कः युद्ध जैसे हालात, नजरों के सामने रोजाना सैकड़ों मौतेंं, डॉक्टर और नर्स टूटे, वसीयत लिख रहे

{डॉक्टर और नर्सें फ्रंट लाइन पर लड़ाई लड़ रहे

पुणे की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता 12 दिन तक वेंटिलेटर पर रही और अब रिकवर हो गई है। हालांकि उसके जरिए पूरे परिवार को संक्रमण हो गया। साथ ही 28 अन्य गांवों तक संक्रमण का खतरा पहुंच गया। जानकारी के मुताबिक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कोरोना सर्वेक्षण के काम में लगी थी और संभवत: इसी दौरान उसे भी संक्रमण हुआ होगा, क्योंकि महिला थर्ड स्टेज की संक्रमित है।

तबियत बिगड़ने पर महिला को फैमिली डॉक्टर को दिखाया। उसे पहले से दमे की बीमारी थी। पहले डॉक्टरों को लगा कि सांस लेने में दिक्कत दमे के कारण है और उसी का इलाज भी किया गया। इस बीच, महिला सर्वे का काम करती रही। 14 मार्च तक स्थिति बिगड़ गई। एक्स-रे में पता चला कि निमोनिया है। 16 मार्च को तबियत ज्यादा बिगड़ी तो उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। 19 मार्च को कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया। इस पर प्रशासन ने हरकत में आते हुए 28 गांवों को क्वारेंटाइन किया, जहां महिला सर्वे के लिए गई थी। फिर पति और 17 साल का बेटा भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए। महिला की बहन का परिवार भी कोरोना संक्रमित मिला, जिसके बाद सभी को होम क्वारेंटाइन किया गया। इसके बाद परिवार को हॉस्पिटल में रखा गया। अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की पहली रिपोर्ट निगेटिव आई है। उन्हें अब दूसरी रिपोर्ट निगेटिव आने की उम्मीद है। परिवार के बाकी सदस्य भी 11 दिन से हॉस्पिटल में हैं।

महिला के ठीक होने में सबसे महत्वपूर्ण आसपास के लोगों का सकारात्मक व्यवहार रहा। कार्यकर्ता के पति और बहन ने उससे कहा था कि बीमारी कितनी भी भयंकर हो, पॉजीटिव बनी रहो। तुम जल्दी ठीक हो जाओगी। पुणे के डॉ. शिवकुमार अय्यर, डॉ. जिग्नेश शाह, डॉ. प्रशांत झेडगे और नर्स स्टाफ की मेहनत ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का इलाज किया।

कश्मीरः एक शख्स ने अपनी मौत का बहाना बनाया

घर लौटने के लिए एक शख्स ने अपनी मौत का बहाना बनाया। उसने 4 साथियों के साथ एेसा किया। इन लोगों ने एंबुलेंस और फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र की मदद से 100 किमी की दूरी तय कर ली। एक चेक पोस्ट पर पकड़े गए। राज्य में 55 लोग संक्रमित मिले हैं। इनमें 40 तब्लीगी जमात के लोगों के संपर्क में आने से संक्रमित हुए हैं।

देश में पहली बार... 3, 5, 8 साल के बच्चे संक्रमित मिले

इंदौर | इंदौर में कोरोना के संक्रमण का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज ने कोरोना पॉजिटिव की जो रिपोर्ट जारी की, उसमें 3, 5 और 8 साल के तीन बच्चे भी हैं। यह देश का पहला ऐसा मामला है, जिसमें इतनी कम उम्र के बच्चों में संक्रमण का खुलासा हुआ है। इंदौर में एक ही घर के 9 सदस्य संक्रमित मिले हैं, जिनमें 3 साल से 45 साल तक की उम्र के लोग हैं। इस परिवार की एक बुजुर्ग महिला पहले से ही संक्रमण के कारण अस्पताल में है। इस परिवार को भी आइसोलेट किया जा चुका है। ज्यादातर करीबी लोग ही संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। इंदौर शहर मुंबई के बाद सबसे ज्यादा संक्रमितों वाला शहर बन चुका है। यहां बुधवार तक 69 मरीज सामने आ चुके थे। शहर में लोगों को क्वारेंटाइन करने के लिए फिलहाल 15 होटल-गार्डन दिए गए हैं। इनमें 1600 से ज्यादा बेड की क्षमता मौजूद है। 2 हजार लोगों को क्वारेंटाइन करने की क्षमता है।

13 दिन में रोजाना मौतों का आंकड़ा 4 गुना, यूके में एक ही दिन में 563 मौतें

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संक्रमितों का रोज का आंकड़ा 42 हजार पार, दुनिया भर में अब 9.12 लाख मरीज

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देश के सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्र में पहुंचा कोरोना15 लाख आबादी वाले मुंबई के धारावी में पहली मौत

मुंबई | देश के सबसे बड़े स्लम इलाके मुंबई के धारावी में बुधवार को कोरोनावायरस का पहला मामला मिला और रिपोर्ट आने के कुछ ही घंटों में उसकी मौत हो गई। 56 साल के इस मरीज का सायन अस्पताल में इलाज चल रहा था। उसके परिवार के 7 सदस्यों को क्वारेंटाइन किया गया। प्रशासन ने बिल्डिंग को सील कर दिया है, जहां यह परिवार रहता था। बिल्डिंग में रह रहे लोगों को खाना पहुंचाया जा रहा है, ताकि लोग बाहर न निकलें। यहां कोरोना मरीज मिलने से चिंता बढ़ गई है। क्योंकि यहां मुंबई की सबसे घनी आबादी है। 535 एकड़ में करीब 10 लाख लोग रहते हैं। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 320 पॉजिटिव केस मिले हैं। इनमें 181 अकेले मुंबई में हैं।


15 महीने था असर, भारत में 1.8 करोड़ की मौत

स्पैनिश फ्लू दुनिया में 15 महीने रहा। आज की ही तरह कम्युनिटी हॉल अस्पताल में बदल दिए गए थे। मास्क न पहनने पर जेल जाने तक का नियम बना था। भारत में फ्लू से 1.8 करोड़ मारे गए थे।

‘हम सुसाइड मिशन पर, अस्पताल स्लाटर हाउस जैसे हुए’

ब्रोंक्स के जैकोबी मेडिकल सेंटर की नर्स थॉमस िरले कोविड-19 वायरस की चपेट में आ चुकी हैं। सुरक्षा उपकरणों की कमी पर वे कहती हैं- ‘मुझे लगता है कि हम सभी को मरने के लिए स्लाटर हाउस भेजा जा रहा है।’ इसी सेंटर में नर्स केली कैबरेरा कहती हैं-‘ऐसा लग रहा है जैसे हम किसी सुसाइड मिशन के लिए भेजे गए हैं। हमारे साथ काम करने वाली एक नर्स की पिछले हफ्ते ही मौत हुई है। हम खुद की लगातार गिरती सेहत देख रहे हैं। हमें कौन रिप्लेस कर पाएगा। यहां हम लोग रोज रोज संक्रमित लोगों के संपर्क में आ रहे हैं, फिर भी हमारी जांच नहीं की जा रही।’

दक्षिण कोरियाः 121 देशों ने टेस्टिंग किट और इलाज का तरीका पूछा

{दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री ने बताया कि 121 देशों ने कोरोनावायरस की टेस्टिंग और इलाज का तरीका जानने के लिए मदद मांगी है। मदद के लिए टास्कफोर्स बनाने जा रहा है। यहां 5 लाख से अधिक टेस्ट हो चुके हैं।

ब्रिटेनः पहली बार एक दिन में मौतों का आंकड़ा 500 के ऊपर निकला

{बुधवार को 563 माैतें हुईं। पहली बार एक दिन में मौतों का आंकड़ा 500 पार हुआ है। 4324 नए मामले आए। देश में 50 हजार स्वास्थ्यकर्मियों में से सिर्फ दो हजार का ही टेस्ट हुआ है। 25% डॉक्टर बीमारी के कारण छुट्टी पर हैं।

स्पेनः आइस स्केटिंग हॉल को मुर्दाघर में बदला, संक्रमित एक लाख के पार


{स्पेन में संक्रमित मामले 1 लाख पार हो गए हैं। 9053 मौतें हो चुकी हैं। यहां प्रशासन नए मुर्दाघर बना रहा है। मैड्रिड की डगनट बिल्डिंग और आइस स्केटिंग हॉल को अस्थाई मुर्दाघर में बदल दिया गया है।


हम अज्ञात और अदृश्य दुश्मन से लड़ रहे, इसलिए मास्क पर वॉरियर लिखा: केल्डरन

नर्स क्रिश्चियन केल्डरन बताती हैं कि सूरज ढलते ही पूरी रात ड्यूटी करने के लिए निकल पड़ती हूं। बेटे को अलविदा कहती हूं और मास्क से अपने चेहरे को ढक लेती हूं। इस मास्क के सामने मैंने वॉरियर्स (योद्धा) लिख लिया है। क्योंकि हम एक युद्ध लड़ रहे हैं। हम एक अज्ञात, अदृश्य और अप्रत्याशित दुश्मन से लड़ रहे हैं। हर कोई युद्ध केे मोड में हैं। सभी डॉक्टर, नर्से और हर कोई। मैं 15 साल से न्यूयॉर्क के प्रेस्बिटेरियन हॉस्पिटल के आईसीयू में काम कर रही हूं। लेकिन एेसा डर का माहौल पहले कभी नहीं देखा। मुझे लग रहा है कि मैं किसी दूसरे देश में हूं। इसने शारीरिक और भावनात्मक दोनों ही तरीके से हमें तोड़ दिया है। मेरी यूिनट में हर दिन लोग दम तोड़ रहे हैं। रोज सैकड़ों मौतें हो रही हैं। मेरी यूनिट में 4 मरीज थे। एक-एक कर सबकी मौत हो रही है। यहां मरीजों को गंभीर हालत में लाया जाता है, जो वेंटिलेटर पर होते हैं। यहां क्षमता से अधिक मरीज हैं। कई लोगों को वेंटिलेटर की जरूरत है, पर उन्हें नहीं मिल पा रहे हैं। हालात बेहद खराब हैं।


सूंघ न पाना और बे-स्वादगी भी कोरोना के लक्षण


{हाल ही में किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने बताया था कि सूंघने की क्षमता में कमी और स्वाद न लगना भी कोरोना के लक्षण हैं। शोधकर्ताओं ने 4 लाख कोविड-19 संक्रमित रोगियों के बताए लक्षणों और उनकी जांच के आधार पर यह नतीजा निकाला है। हालांकि वायरल बुखार और सर्दी-खांसी में भी यही लक्षण होते हैं। लेकिन मौजूदा परिस्थिति में शोधकर्ताओं का मानना है कि इन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। चीन, ईरान, इटली, जर्मनी और फ्रांस में ऐसे ही मरीजों का पता चला है।

छींक-खांसी से निकलीं बूंदें 27 फीट दूर जा सकती हैं

{एमआईटी के असिस्टेंट प्रोफेसर और फ्लूएड डायनमिक्स एक्सपर्ट लीडिया बोरबिबा का कहना है कि किसी कोरोना संक्रमित की छींक या खांसी से निकलीं बूंदें 27 फीट (7-8 मीटर) दूर तक जा सकती हैं। लीडिया के मुताबिक, छींक या खांसी से बनने वाली गैस 33 से 100 फीट प्रति सेकंड तक सफर करती है, जो 23 से 27 फीट दूर तक फैल सकती है। लीडिया का यह रिसर्च पेपर जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन में छपा है। इसमें डब्ल्यूएचओ के दावे को नकारा गया है।

गैर-लक्षण मरीजों ने फिर से सोचने पर मजबूर किया

{एक स्टडी के मुताबिक, कोविड-19 के हर तीन में से एक मरीज वायरस का साइलेंट कैरियर बना। ये वो मरीज हैं, जिनमें बुखार, सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण नहीं दिखते। होकाइडो यूनिवर्सिटी के एपिडोमिलॉजिस्ट हिरोशी निशिहुरा के मुताबिक, इन गैर-लक्षण मरीजों के आंकड़े ने हमें महामारी से निपटने के तरीकों पर फिर से सोचने पर मजबूर किया है। ये साइलेंट कैरियर्स छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हो सकते हैं। इससे पहले विशेषज्ञों ने कहा था कि 10 में से 6 मरीजों में कोरोना के शुरुआती लक्षण देखने नहीं मिले।


कोरोना के 3 में से 1 रोगी साइलेंट कैरियर, 25% मरीजों में नहीं दिखते लक्षण, चीन में दोबारा टेस्टिंग, अमेरिका ने हाई ट्रांसमिशन जोन में रखा

एजेंसी | लंदन/बीजिंग

कोरोना पीड़ित दुनिया में ‘साइलेंट कैरियर\' इंसानों की अब नई प्रजाति बन गए हैं। ये वो हैं, जिनके कोविड-19 टेस्ट का रिजल्ट पॉजिटिव है, लेकिन उनमें कई दिनों तक लक्षण नहीं दिखते। साइलेंट कैरियर्स की संख्या इतनी ज्यादा है कि इसने अब चीन, अमेरिका और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को चिंता में डाल दिया है। चीन में ऐसे मरीजों को दोबारा जांचने के साथ लक्षणों की पहचान भी फिर से की जा रही है। जबकि अमेरिका में ऐसे मरीजों को हाई जोन में आइसोलेट किया गया है।

वुहान की हुआजहोंग यूनिवर्सिटी के पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट वू तंगचुन के मुताबिक, जिन संक्रमितों का इलाज हुआ, उनमें 59% ऐसे मरीज थे, जो बिना टेस्ट कराए बाहर हैं और इन्हीं की वजह से यह वायरस पहले हुबेई और बाद में पूरी दुनिया में फैला। इधर, अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के डायरेक्टर रॉबर्ट रेडफिल्ड के मुताबिक, ऐसे सैकड़ों मरीज मिले हैं, जिन्हें अब हाई ट्रांसमिशन जोन में रखा गया है। वहीं नीदरलैंड्स के अरासमस मेडिकल सेंटर में वायरस साइंस विभाग की प्रमुख मेरियन कूपमन्स के मुताबिक, संक्रमित मरीजों में 25% ऐसे मामले मिले हैं, जिनमें कोविड-19 के शुरुआती लक्षण देखने को नहीं मिले।

दिल्ली में 55, राजस्थान में 27 नए मरीज

राज्य कुल मामले नए केस मौतें ठीक हुए

महाराष्ट्र 322 20 14 39

केरल 265 24 2 26

तमिलनाडु 235 161 1 5

दिल्ली 152 55 2 5

उत्तर प्रदेश 113 5 2 17

कर्नाटक 105 7 3 9

राजस्थान 120 27 3 14

मध्य प्रदेश 86 21 6 0

गुजरात 87 13 6 5

तेलंगाना 77 -- 6 14

-रात साढ़े दस बजे तक

 थाईलैंड ने लॉकडाउन की वजह से मोबाइल डेटा फ्री किया

थाईलैंडः लॉकडाउन के चलते जनता को सहूलियत देने के लिए मोबाइल डेटा फ्री किया।

इटलीः 4 अप्रैल को खत्म हो रहे लॉकडाउन को 13 अप्रैल तक के लिए बढ़ाया गया।

सऊदी अरब ने कहा- दुनियाभर के मुसलमान अभी हज यात्रा का प्लान न बनाएं। इंतजार करें।

बेल्जियमः यहां बिल्ली कोरोना पॉजिटिव मिली। दुनिया का पहला मामला।

 हेल्थकर्मी की जान गई तो दिल्ली सरकार 1 करोड़ रु. देगी

दिल्लीः कोरोना का इलाज करने वाले हेल्थ वर्कर्स की जाने पर राज्य सरकार 1 करोड़ रु. देगी।

देशभर में 74 फ्लाइट्स मेडिकल सामान पहुंचा रही हैं। अब तक 37 टन सामग्री पहुंचाई गई है।

लुधियानाः कर्फ्यू तोड़ने वाले लोगों के लिए 6 हजार की क्षमता वाली 4 जेल बनाई।
महाराष्ट्रः 162 संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने वाले 5 हजार लोगों को क्वारेंटाइन में रखा।

अफवाहों के विरुद्ध


कोरोना पर सोशल मीडिया पर बहुत सी खबरें वायरल हो रही हैं। इनमें से कई समाचार झूठे हैं। भास्कर ऐसी खबरों की पड़ताल करेगा और पाठकों को सच्चाई बताएगा।

फैसला: रुमाल को दो फोल्ड करके इस्तेमाल करना भी मास्क कहलाएगा

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि घर में बने मास्क भी अब मान्य होंगे। उदाहरण के लिए डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारी रुमाल को दो फोल्ड करके इस्तेमाल करे तो वह भी मास्क माना जाएगा।

एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से 28 गांवों में पहुंचा कोरोना का खतरा, सभी गांव क्वारेंटाइन किए गए, महिला ठीक हुई

लॉकडाउन तब भी हुआ था, बंद कर दिए गए थे स्कूल और चर्च

तब भी...अखबारों में विज्ञापन देकर हाथ धोना सिखाया गया था

100 साल पहले जैसे हालात: क्वारेंटाइन, मास्क पहनने व भीड़ से दूर रहने की थी सलाह

न्यूयॉर्क की सर्जन कहती हैं-काम पर जाने से डर लगता है

न्यूयॉर्क में सर्जन डॉ कोर्नेलिया ग्रिग्स कहती हैं, यह पहली बार है जब मुझे काम पर जाने से डर लग रहा है, लेकिन हमें जान बचाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है और हम यही कर रहे हैं। पहले मैंने और मेरे पति ने कभी वसीयत लिखने के बारे में नहीं सोचा था, लेकिन अब जरूरी हो गया है।

दहशत एेसी, गर्भवती महिलाएं न्यूयॉर्क सिटी छोड़ कर जा रहीं


न वेंटिलेटर, न सुरक्षा उपकरण

देश: सात राज्यों में संक्रमित लोगों की संख्या 100 पार

एजेंसी | न्यूयॉर्क

कोरोनावायरस से डॉक्टर और नर्सें फ्रंट लाइन पर लड़ाई लड़ रही हैं। जिंदगी और मौत से संघर्ष करते मरीजों की देखभाल करने वाले इन डॉक्टर्स और नर्सों को पता है कि जरा सी लापरवाही होते ही यह घातक बीमारी उन्हें भी अपनी चपेट में ले लेगी। चीन में 3,300, स्पेन में 12,000 और इटली में 5000 से ज्यादा मेडिकल स्टाफ इस बीमारी के चपेट में आ चुकी है। दुनियाभर में 300 से ज्यादा डॉक्टरों की मौत इस बीमारी से हो चुकी है। आज यहां के मेडिकल स्टाफ से जानिए िक वे कोरोना से िकस तरह लड़ रहे है...

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 रोजाना मौतें

मार्च

15

17

19

21

23

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6520

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 नए संक्रमित

15

17

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23

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मार्च

अस्पताल में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता।

पति और बहन ने कहा था-पॉजिटिव बने रहो, तुम ठीक हो जाओगी

अमेरिका में स्पैनिश फ्लू से 6.75 लाख लोग मारे गए थे**

कई संवेदनशील शहरों में लॉकडाउन कर दिया गया था। स्कूल, चर्च और सार्वजनिक स्थान बंद थे।

अखबारों में हाथ धोने के विज्ञापन थे। सड़कों पर पोस्टर लगाकर बताया गया कि वायरस से कैसे बचें ।

1918 में फैले स्पैनिश फ्लू के समय भी हालात आज जैसे ही थे। वायरस से बचने के लिए क्वारेंटाइन, खुद को आइसोलेशन में रखने और सैनेटाइजेशन के अलावा कोई उपाय नहीं था। बीमार हो रहे लोगों को नमक के पानी से गरारे करने और क्वारेंटाइन की सलाह दी गई थी। विशेषज्ञाें का मानना है कि 1918 की गर्मियों में स्पैनिश फ्लू स्पेन से शुरू हुआ। किसी पक्षी या स्तनपायी से यह वायरस इंसान के शरीर में आया। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यह अमेरिका के कंसास में शुरू हुआ, तो कुछ का कहना है कि यह फ्रांस या चीन से निकला। इस महामारी ने दुनियाभर में 5 करोड़ लाेगों की जान ले ली थी। अकेेले अमेरिका में 6 लाख 75 हजार लोग मरे थे। महामारी की यही स्थिति आज फिर कोविड-19 में है।

केल्डरन ने मास्क पर वॉरियर लिख लिया है।

{अस्पतालों में क्षमता से कहीं अधिक मरीज

न्यूयॉर्क िसटी में हर कोई दहशत में है। प्रेग्नेंट महिलाएं दूसरे सुरक्षित शहरों की तरफ भाग रही हैं। एरीला टैबिक 31 हफ्ते की गर्भवती हैं। वे न्यूयॉर्क से कोलारेडो चली गई हैं। उन्होंने न्यूयॉर्क के एक हॉस्पिटल में बच्चे को जन्म देने की योजना बनाई थी। लेकिन अब उन्हें यह काफी डरावना लग रहा है। वो कहती हैं कि न्यूयॉर्क छोेड़ना सही फैसला है। जैसे ही प्लेन ने उड़ान भरी थी, मैं बुरी तरीके से रोने लगी थी, मुझे अपना घर छोड़ने का दुख था। लेकिन यहां अस्पतालों में सुरक्षात्मक उपकरण और वेंटिलेटर तक नहीं बचे हैं। डॉक्टर और नर्स तक इस वायरस से संक्रमित हैं। साथ ही मैं तंगहाली से गुजर रहे हॉस्पिटल पर बोझ भी नहीं बनना चाहती। पिछले हफ्ते ही न्यूयॉर्क के दो प्रमुख अस्पताल प्रेस्बिटेरियन और माउंट सिनाई ने लेबर रूम और डिलेवरी रूम में सहायक व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसका कई गर्भवती महिलाओं, दाइयों ने विरोध किया है।

छोटे बच्चों, बुजुर्गों में भी शुरुआती 10 दिनों तक लक्षण नहीं दिखते

इनमें लक्षण नहीं दिखते, जिससे पहचान मुश्किल

 }कोरोना वायरस के साइलेंट कैरियर बने ‘इंसानों की नई प्रजाति’, चीन-अमेरिका की चिंता बढ़ाई


कोरोना के लिए सरकारी हेल्पलाइन...

वॉट्सएप नंबर 90131-51515 पर मैसेज करें।
नेशनल हेल्पलाइन 011-23978046 पर कॉल करें।



वायरल: समुद्री नमक और संतरे के छिलकों की भाप से कोरोना वायरस ठीक हो जाता है।

यह बिल्कुल गलत है। मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी प्रकार की भाप लेने या गरारे करने से यह वायरस ठीक नहीं होता। इसकी अभी कोई दवा नहीं खोजी जा सकी है।

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अमृतसर, वीरवार, 02 अप्रैल, 2020



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Amritsar News - new york war like circumstances hundreds of deaths daily in front of eyes doctors and nurses broken writing a will
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न्यूयॉर्कः युद्ध जैसे हालात, नजरों के सामने रोजाना सैकड़ों मौतेंं, डॉक्टर और नर्स टूटे, वसीयत लिख रहे न्यूयॉर्कः युद्ध जैसे हालात, नजरों के सामने रोजाना सैकड़ों मौतेंं, डॉक्टर और नर्स टूटे, वसीयत लिख रहे Reviewed by Dibyendu on 18:55 Rating: 5

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