रोहित वाट्स | अबोहर .2017 विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में सत्ता बदलते ही अकाली दल सुप्रीमो सुखबीर बादल और पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान सुनील जाखड़ के बीच की वैचारिक और राजनीतिक जंग जहां पिछले कुछ महीनों से थमी हुई थी, वहीं शनिवार को जाखड़ ने जलालाबाद विधानसभा से शुरुआत करके सुखबीर बादल को फिर चुनौती दे डाली है। 2019 लोकसभा चुनावों में फिरोजपुर सीट पर प्रचार के समय सुखबीर बादल ने जाखड़ के खिलाफ तीखे वार किए थे। लेकिन उस समय गुरदासपुर सीट पर चुनाव में व्यस्त होने के कारण जाखड़ सुखबीर के बयानों का जवाब नहीं दे पाए थे।
पिछले 5 महीनों से दोनों नेता एक दूसरे के खिलाफ कम बोलते नजर आए, इसलिए वर्करों में था कि शायद दोनों नेताओं में कोई समझौता हो चुका है। लेकिन अगले महीने पंजाब की चार सीटों पर होने वाले उपचुनावों में जाखड़ द्वारा सबसे पहले जलालाबाद सीट पर चुनाव प्रचार करने के फैसले ने तय कर दिया है कि कांग्रेस पार्टी की सबसे ज्यादा नजर इसी सीट पर होगी। क्योंेकि इस सीट से लगातार सुखबीर बादल चुनाव लड़ते आए हैं। इस सीट पर बादल की प्रतिष्ठा दांव पर होगी। जहां सुखबीर की प्रतिष्ठा दांव पर होगी तो जाखड़ भी इसी सीट को चुनौती मानकर प्रचार मैदान में कूद गए हैं।
कांग्रेस के लिए जलालाबाद सीट इसलिए अहम...कांग्रेस के करीबी सूत्रों की मानें तो जाखड़ ने आवला को टिकट इसलिए दिलाई है क्योंकि आवला बेहद समृद्ध परिवार से संबध रखते हैं । वह 2017 में फरीदकोट से चुनाव लड़ने के मूड़ में थे। लेकिन एन वक्त पर पार्टी ने टिकट काट दी और उन्हें आगामी चुनावों में टिकट देने का वादा किया था। अब कांग्रेस ने आवला उम्मीदवार बना दिया है, लेकिन वर्तमान में जो हालात बन रहे हैं उससे साफ है कि पंजाब की चारों सीटों में से कांग्रेस सर्वाधिक जोर जलालाबाद सीट पर ही लगाने वाली है। वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार इस सीट पर सीधे तौर सुनील जाखड़ और सुखबीर बादल के बीच टक्कर होगी। इसीलिए अकाली दल बहुत सोच समझकर अपने उम्मीदवार का चयन कर रही है।
चंडीगढ़ में मीटिंग, सबसे पहले जलालाबाद चुना :लगभग एक महीना पूर्व अकाली दल प्रधान सुखबीर बादल ने एेलान किया था कि मात्र उम्मीदवार का चेहरा जलालाबाद सीट पर बदलेगा, लेकिन चुनाव उनका खुद का ही होगा। इस बयान को उन्होंने वर्करों में जोश भरने के लिए तो दिया लेकिन कांग्रेस ने इसे चैलेंज के रूप में लिया। इसीलिए शुक्रवार को जब कांग्रेस प्रधान सुनील जाखड़ की सीएम कैप्टन व अन्य कार्यकर्ताओं के साथ बैठक थी तो उसमें ये फैसला हुआ कि सबसे पहले पार्टी जलालाबाद सीट पर प्रचार शुरू करेगी।
चारों सीटों की हार जीत से होगी 2022 की समीक्षा :पंजाब में फगवाड़ा, मुकेरियां, दाखा और जलालाबाद की सीट पर कोई भी पार्टी जीत हासिल करे, उसका परिणाम 2022 के चुनावों को हर हाल में प्रभावित करेगा। क्योंकि एक तरफ अकाली दल बार-बार जनता में ये प्रचार कर रहा है कि लोगों में कांग्रेस के प्रति गुस्सा है तो दूसरी तरफ पंजाब में विकास न करवाकर अभी तक अकाली दल के पुराने कार्यों को कोस रही कांग्रेस और दोबारा से लोगों के बीच आई आप के लिए परीक्षा की घड़ी है। चारों सीटों पर जीत चाहे किसी भी पार्टी की हो, परिणामों के बाद 2022 की समीक्षा जरूर बन जाएगी।
क्या है स्थिति...जलालाबाद सीट पर कांग्रेस के वर्कर बागी, अकाली एकजुट :कांग्रेस द्वारा जलालाबाद सीट पर अपने उम्मीदवार की घोषणा तो कर दी गई है लेकिन पार्टी के लिए सबसे बड़ी परेशानी बगावत के रूप में उभरकर सामने आ गई है। युवा कांग्रेसी नेता गोल्डी कंबोज ने आजाद चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। सूत्रों के अनुसार गोल्डी कंबोज को पता चल गया था कि शनिवार को जाखड़ जलालाबाद में चुनाव प्रचार के लिए आ रहे हैं और इस दौरान उनसे संपर्क भी किया जा सकता है। इसलिए उन्होंने हर स्थिति को खत्म करते हुए पहले ही नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। कांग्रेस के लिए चाहे ये हॉट सीट बन चुकी है लेकिन इस बगावत का कितना असर देखने को मिलेगा ये चुनाव परिणाम ही बताएंगे।
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