अमृतसर.पिछले साल दशहरे वाले दिन, 19 अक्टूबर को जाैड़ा फाटक पर हुए रेल हादसे में मारे गए 70 लोगों के परिवारों के एक-एक सदस्य को पंजाब सरकार ने नौकरी देने का वादा किया था। दशहरा फिर आ गया है, लेकिन यह वादा आज तक पूरा नहीं हुआ। मृतकों के परिवार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं। गुजरे 11 महीनों में नौकरी के लिए इनसे 4-5 बार फार्म तो भरवाए गए, मगर मिला कुछ नहीं।
इन परिवारों ने हादसे में अपने उन सदस्यों को गंवाया जिनके बूते परिवार का खर्च चलता था। आज इनके लिए घर का गुजारा चलाना तक मुश्किल हो चुका है। हादसे के बाद पंजाब सरकार ने इन परिवारों को 5-5 लाख रुपए का मुआवजा दिया। केंद्र ने भी महीनेभर पहले इन परिवारों को 2-2 लाख के चेक दिए हैं।
हालांकि कई परिवारों को केंद्र की मुआवजा राशि अभी तक नहीं मिल पाई है। सरकारी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए महीनों की दौड़-धूप के बाद इन्हें जो मुआवजा राशि मिली, उसका बड़ा हिस्सा उधार चुकाने में चला गया। कुछ ऐसे भी हैं जिनके मुआवजे की रकम रिश्तेदार हड़प गए। मुआवजा राशि दिलाने के नाम पर भी कई लोगों ने इन्हें ठगा। आज हालत ये है कि सारी रकम खत्म हो चुकी है। इन्हें अब सिर्फ सरकारी नौकरी ही सहारा दिख रही है लेकिन पंजाब सरकार तो नौकरी देने की बात ही नहीं कर रही।
3 सर्वे कराए, मिला कुछ नहीं
हादसे में 19 साल के बेटे तरुण की मौत हो गई। वह घर का खजाना था। अब तो यह भी नहीं समझ पा रहे कि जीएं तो किसके लिए। सरकार के नुमाइंदे 3 बार सर्वे करके जा चुके हैं, लेकिन न तो आज तक कोई नौकरी देने आया है और न ही हाल पूछने।- लवली, मृतक तरुण की मां।
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