शहर की पुरानी दशहरा कमेटियां ही इस बार दशहरा पर्व मनाने की तैयारियाें में जुटी हैं। अगर प्रशासन की तरफ से दशहरा मनाने की परमिशन दी गई तो इस बार शहर में दशहरा के दिन 4-5 स्थानों पर ही रावण के पुतले जलेंगे। इस वजह से लोहगढ़ गेट शेखा वाले कारखाने इलाके में रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले बनाने के काम धीमी गति से चल रहा है।
कारीगर बोले-लोहगढ़ गेट की मुख्य सड़क पर पुतले बनाने की इजाजत नहीं दी
दशहरा पर्व को लेकर रावण के पुतले तैयार करते कारीगर।
पुतले बनाने वालों का कहना है कि सख्ती के कारण लोहगढ़ गेट की मुख्य सड़क पर पुतले बनाने की इजात नहीं है। इस बार जिस ग्राउंड में पुतले जलेंगे वहीं पुतले बन रहे हैं। फिलहाल उनके पास माता भद्रकाली मंदिर में तीन पुतले बनाने का आॅर्डर आया है। जबकि दुर्ग्याणा कमेटी की तरफ से भी पुतले बनाए जा रहे हैं। इस ग्राउंड में तीन पुतले लगेंगे। जबकि छेहर्टा दाना मंडी स्थित पंच रतन कृष्णा मंदिर कमेटी की तरफ से दशहरा पर्व मनाने को लेकर पुतले तैयार करवाए जा रहे हैं।
अभी तक 50 पुतलों का भी ऑर्डर नहीं आया: इस बार काम बहुत कम है। इससे 250 घर चलते थे। अब तक 500 पुतले बना देते थे। इस बार 50 पुतलों के आॅर्डर भी नहीं आया। 10 फीट के पुतले पर दो से पांच हजार खर्च आता था परंतु अब 7 से 10 हजार रुपए तक है। 70 साल से पुतले बनाने वालों बुजुर्गों का कहना है कि पहले पुतले अमृतसर समेत तरनतारन, जालंधर, पठानकोट तक जाते थे। इस बार बाहर से आॅर्डर नहीं है। रावण का पुतला 70 फुट, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले 50-50 फुट के होंगे।
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सख्ती होने से दशहरे के लिए रावण के पुतले बनाने वाले कारीगरों का काम मंदा
Reviewed by Dibyendu
on
19:01
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