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सिंगल यूज प्लास्टिक फ्री शहर होने पर रोजाना 80 क्विंटल कम निकलेगा कूड़ा

सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगने पर पटियाला शहर से रोज 80 क्विंटल प्लास्टिक कचरा कम होने की उम्मीद है। नगर निगम के मुताबिक इस समय रोजाना करीबन 240 टन कूड़ा निकल रहा है। इसमें 65 फीसदी गीला कूड़ा, 30 फीसदी सूखा कूड़ा और 5 फीसदी ऐसा कूड़ा है जिसे खत्म नहीं किया जा सकता है। इसमें बड़ा हिस्सा एक बार इस्तेमाल कर फेंक दी जाने वाली पन्नियों, बोतलों व खाने-पीने के सामान के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले डिस्पोजल का है। यह खतरनाक इसलिए है क्योंकि न तो यह नष्ट होता है न ही रिसाइकिल हो सकता है। यह माइक्रो प्लास्टिक में तब्दील होकर हमारी फूड चेन में शामिल होकर शरीर के भीतर पहुंच रहा है। निगम 2 अक्टूबर को पटियाला को सिंगल यूज पॉलीथीन फ्री सिटी डिक्लेयर करने जा रही हैं। निगम आडिटोरियम में निगम अौर पीपीसीबी मिलकर जिला स्तरीय कार्यक्रम में शहर को सिंगल यूज प्लास्टिक फ्री सिटी डिक्लेयर करेंगे।

पेपर डिस्पोजल की डिमांड गिरी

थोक व्यापारियों की माने तो सिंगल यूज प्लास्टिक वाले डिस्पोजल ग्लास पर प्रतिबंध के बाद विकल्प के रूप में गत्ते व पेपर वाले डिस्पोजल ग्लास की तेजी से डिमांड बढ़ी थी, लेकिन ग्लास में पेय डालने के कुछ सेकेंडों बाद ही उनके गल जाने व लीक होने पर डिमांड धड़ाम से नीचे गिरी है। अब फुटकर दुकानदार इन ग्लास को नहीं मंगवा रहे हैं। इससे मंगवाया गया स्टॉक खराब हो रहा है।

तैयारी ऐसी...धड़ाधड़ चालान, जागरुकता के लिए स्टूडेंट्स लिए साथ

इधर निगम ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर अंकुश लगाने के लिए धड़ाधड़ चालान शुरू कर दिए हैं। बुधवार को चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर भगवंत सिंह ने शहर के सबसे मेन बाजार शेरां वाला गेट से लेकर तवक्कली मोड़ तक कई दुकानों की चैकिंग की अौर 10 किलो प्लास्टिक कैरीबेग जब्त किए। वो पिछले कई दिनों से प्लास्टिक रखने वालों के धड़ाधड़ चालान भी काट रहे हैं। इसके अलावा बुधवार शाम को निगम ने पोस्ट अॉफिस के साथ मिलकर जागरूकता रैली भी निकाली। एनएसएस कैडेट्स ने प्लास्टिक के प्रति अवेयर करने को शहर में रैली निकाली।

समझिए- सिंगल यूज प्लास्टिक की मौजूदा स्थिति, उनके विकल्प और सेहत पर असर

प्लास्टिक बैग | सिंगल यूज प्लास्टिक में सबसे बड़ा योगदान इसी का है।

विकल्प | जूट, कपड़े और मोटे कागज के कैरीबैग।

छोटी प्लास्टिक बोतल| पैकेज्ड पानी, कुकिंग ऑइल्स की पैकिंग में इस्तेमाल होता है। इन्हें बाद में फेंक दिया जाता है।

विकल्प | तांबे-स्ट्रील जैसी धातुओं, कांच की बोतलें

प्लास्टिक प्लेट | दोने शादी, पार्टी, स्ट्रीट फूड कॉर्नर जैसी जगहों पर इनका सर्वाधिक इस्तेमाल इन दिनों हो रहा है। गंदगी का बड़ा कारण ये भी है।

विकल्प | खांखर या ढाक, केला और कमल के पत्तों से बने दोना-पत्तल। शहरों में खुल रहे बर्तन बैंक।

स्ट्रा पाइप | जूस पीने के लिए स्ट्रा पाइप का चलन तेजी से बढ़ा है। प्लास्टिक से बनी यह पाइप एक बार इस्तेमाल के बाद फेंक दी जाती है।

विकल्प | बाजार में सस्ती कीमत में कागज की स्ट्रा पाइप हैं।

प्लास्टिक कप-ग्लास | चाय, पानी, आदि के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं। आयोजनों में इसका खूब उपयोग होता है।

विकल्प | कुल्हड़। कांच व मेटल के गिलास की बोतल।

शैचेट्स (पाउच)| शैंपू, हेयर ऑइल और अचार बनाने वाली कंपनियां शैसे (प्लास्टिक पाउच) में पैकिंग कर बेचती हैं। इन्हें इस्तेमाल के बाद फेंक दिया जाता है।

विकल्प | इसके विकल्प अब तक तय नहीं हो सका है। इसलिए इसके प्रतिबंध पर भी अभी सहमति नहीं बन पाई है। जल्द ही इस पर फैसला आ सकता है।

50 माइक्रोन से ज्यादा के कैरीबैग की संभावना

कैरीबैग में कपड़े व बायोडिग्रेड का विकल्प मौजूद है, लेकिन कारोबारियों ने बताया कि अचानक से बंद सिंगल यूज प्लास्टिक के बाद व्यापारियों से दुकानदार और ग्राहकों की दिक्कतों को देख सरकार ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सिर्फ 25 जीएसएम से कम नॉन वुवेन व 50 माइक्रॉन से कम के कैरीबैग को ही बैन करने का सुझाव दिया है। इसके बाद कुछ कारोबारी 25 जीएसएम नॉन वुवेन और 50 माइक्रॉन से ज्यादा के कैरीबैग बनाने लगे हैं। स्ट्रा व डिस्पोजल ग्लास के विकल्प के रूप में स्थित स्पष्ट नहीं है।

माइक्रो प्लास्टिक का सेहत पर असर

प्लास्टिक के एेसे बारीक कण जो 5 एमएम से छोटे हैं, उन्हें माइक्रो प्लास्टिक कहा जाता है। 100 एमएम से छोटे प्लास्टिक कण नैनो प्लास्टिक। यह दोनों ही हमारी इनवायरमेंट के लिए खतरनाक हैं। दुनिया भर में सप्लाई हो रहा 90 फीसदी समुद्री नमक व 800 प्रजाति के सी-फूड माइक्रो प्लास्टिक से प्रदूषित है। ये हमारी फूड चेन में प्रवेश कर गया है। इंसानों में फेफड़ों व किडनी के कैंसर के लिए सर्वाधिक जिम्मेदार यही माइक्रो प्लास्टिक है जो किसी न किसी रूप में ह्यूमन बॉडी में जा रही है।



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सिंगल यूज प्लास्टिक फ्री शहर होने पर रोजाना 80 क्विंटल कम निकलेगा कूड़ा सिंगल यूज प्लास्टिक फ्री शहर होने पर रोजाना 80 क्विंटल कम निकलेगा कूड़ा Reviewed by Dibyendu on 18:56 Rating: 5

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