कुछ कॉलेजों में सेक्सुअल हैरासमेंट कमेटी नहीं है और एक सर्वे में 27 परसेंट गर्ल स्टूडेंट्स ने ऐसा माना है। यह सब कुछ उस सर्वे में सामने आया है जो पंजाब यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट आयुषी शर्मा ने किया है। पंजाब यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स एंड ड्यूटीज की स्टूडेंट आयुषी ने पॉलिसी फॉर प्रोवेशन ऑफ सेक्सुअल हैरासमेंट (पॉश) एक्ट 2013 की अवेयरनेस के उपर सर्वे करवाया और इसमें स्टूडेंट्स ने एक्ट के कई मुद्दों पर खुलकर बात की। सेक्टर 27 की रेजिडेंट आयुषी ने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ के कॉलेज, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला, चितकारा यूनिवर्सिटी और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के दो हजार स्टूडेंट्स पर यह सर्वे किया।
सेक्सुअल हैरासमेंट कमेटी नहीं: स्टडी के हिसाब से 86 परसेंट स्टूडेंट्स ने यह कहा कि उन्हें सेक्सुअल हैरासमेंट के पॉश एक्ट 2013 के बारे में पूरी जानकारी है जबकि 14 परसेंट ने कहा कि वह इस पर जागरुक नहीं है। इसके अलावा यूजीसी की ओर से बनाए गए सेक्सुअल हैरासमेंट के रेगुलेशंस 2015 के बारे में 69 परसेंट को पता था जबकि 31 परसेंट को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी। इंटरनल कम्पलेंट्स कमेटी के बारे में पूछने पर 73 परसेंट स्टूडेंट्स ने बताया कि उनके यहां पर यह कमेटी है जबकि 28 परसेंट ने कहा कि उनके इंस्टीट्यूशन में इस तरह की कोई कमेटी नहीं है।
यह था मकसद: सर्वे का मकसद यह जानना था कि सैक्सुअल हैरासमेंट को लेकर कॉलेज और यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स अपने राइट्स को लेकर जागरुक हैं या नहीं। वर्कप्लेस में सभी को सामान भागीदारी और सभी को सामान ऑपरच्युनिटी मिल रही है या नहीं। कुल दो हजार स्टूडेंट्स के उपर यह स्टडी की गई है। सैक्सुअल हैरासमेंट की कमेटी है या नहीं और शिकायत आने पर क्या उसका सामाधान नियमों के मुताबिक हुआ या फिर सैक्सुअल हैरासमेंट कमेटी ने लापरवाही बरती।
12 परसेंट ने माना कि हुई सेक्सुअल हैरासमेंट: सर्वेे में 12 परसेंट लड़कियों ने यह माना कि उनके साथ सेक्सुअल हैरासमेंट हुई है। यह हैरासमेंट उनके साथ उनके संबंधित इंस्टीट्यूशन में ही हुई। इनमें फिजिकल हैरासमेंट और वर्बल सेक्सुअल कमेंट्स शामिल हैं। कुछ ने माना कि उन्हें पॉर्न दिखाया गया जबकि कुछ के साथ छेड़खानी हुई।
सर्वे में यह भी सामने आया कि जिनके साथ सेक्सुअल हैरासमेंट हुई उनमें से ज्यादातर ने इसकी रिपोर्ट सेक्सुअल हैरासमेंट कमेटी को दी थी। जिन्होंने शिकायत नहीं की उनका मानना था कि ऐसा करने से उनके व परिवार की बदनामी होगी। सेक्सुअल हैरासमेंट का मामला आने के बाद कमेटी ने अपना काम बेहतर तरीके से किया या नहीं। इसको लेकर 72 परसेंट स्टूडेंट्स ने कहा कि उनके इंस्टीट्यूशन ने नियम के हिसाब से सबकुछ किया जबकि 27 परसेंट ने यह माना कि शिकायतों का निपटारा सही से नहीं किया गया।
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