कस्टमर की एफडी मैच्योर होने के बावजूद भी कोऑपरेटिव सोसायटी ने उसे उसका पैसा नहीं लौटाया। अब सोसायटी को न सिर्फ ब्याज के साथ एफडी का पैसा लौटाना होगा बल्कि 25 हजार रुपए हर्जाना अलग से भरना पड़ेगा।
डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर फोरम ने विकासनगर मौलीजागरां के सुनील चौधरी की शिकायत पर हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के खिलाफ ये फैसला सुनाया है। चौधरी ने शिकायत में बताया था कि उन्होंने 29 जनवरी 2016 को सोसायटी का एक फिक्स्ड डिपॉजिट प्लान लिया था।
उन्होंने 94 हजार 154 रुपए जमा करवाए थे। उन्हें बताया था कि 3 साल बाद एफडी मैच्योर होने पर उन्हें 1 लाख 44 हजार 621 रुपए मिलेंगे। एफडी 29 जनवरी 2019 को मैच्योर हो गई। जब उन्होंने सोसायटी से मैच्योरिटी का पैसा मांगा तो वे मामले को लटकाते रहे। जब उन्हें मैच्योरिटी का पैसा नहीं मिला तो उन्होंने सोसायटी के खिलाफ कंज्यूमर कमीशन में शिकायत दी।
सोसायटी ने पक्ष रखते हुए कहा कि ये मामला कंज्यूमर कमीशन में नहीं सुना जा सकता। मामले की सुनवाई आर्बिट्रेशन में होनी चाहिए। सोसायटी की इन दलीलों को कंज्यूमर कमीशन ने खारिज कर दिया।
कमीशन ने सोसायटी को 1 लाख 44 हजार 621 रुपए रिफंड करने के निर्देश दिए। वहीं, सोसायटी पर 25 हजार रुपए हर्जाना लगाया। 10 हजार रुपए मुकदमे पर हुए खर्च को भी अदा करने के निर्देश दिए।
कमीशन ने 30 दिनों के अंदर ये ऑर्डर मानने के निर्देश दिए। आदेश का पालन नहीं किया गया तो सोसायटी को कस्टमर को 12 परसेंट ब्याज अलग से चुकाना पड़ेगा।
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