जिले के 6 हॉकी खिलाड़ियों ने 1928 से 1980 तक देश को ओलिंपिक में 8 गोल्ड, एक सिल्वर दिला कर नाम रोशन किया था। इनमें 1928 में केहर सिंह गिल हॉकी टीम में पहले सिख खिलाड़ी थे, जिन्होंने इंडिया को पहला गोल्ड दिलाया था। इसके बाद गुरचरण सिंह किला रायपुर ने 1932 से 1936 तक इंडियन टीम में गोल्ड मेडल दिलाए। 1948, 1952, 1956 में लगातार गोल्ड मेडल भारतीय हॉकी टीम के नाम रहे। 1960 में सिल्वर, 1964 में गोल्ड, 1968-72 में ब्रॉन्ज और 1980 में गोल्ड मेडल मॉस्को में जीता। इसके बाद 40 साल में इंडिया टीम के नाम कोई भी मेडल नहीं रहा
इसके बाद रायकोट के रमनदीप सिंह ने सिडनी ओलिंपिक-2000 में टीम इंडिया के कैप्टन तो जरूर बने, मगर मेडल नहीं जीत पाए। मगर आज भी केहर सिंह गिल, गुरचरण सिंह, हरदीप गरेवाल, बलबीर गरेवाल, गुरबख्श गरेवाल, बालकृष्ण गरेवाल जिले के ध्यानचंद माने जा रहे हैं। मेजर ध्यानचंद को हाॅकी खेल का जादूगर भी कहा जाता है। इसलिए इनकी याद में 29 अगस्त को नेशनल स्पोर्ट्स डे मनाया जाता है। भास्कर से खास बातचीत में ओलिंपियन नेशनल स्पोर्ट्स डे पर सरकार की पॉलिसी पर भी सवालिया निशान खड़े किए हैं।
हरियाणा की तर्ज पर मिलें सुविधाएं
खेल प्रमोटर जगबीर सिंह ग्रेवाल ने बताया कि लुधियाना में सरकार के सहयोग से मालवा अकादमी चलाई जा रही है। जबसे कैप्टन सरकार सत्ता में आई है। तब से खिलाड़ियों को किसी भी तरह की कोई सुविधा नहीं मिली है। उन्होंने पंजाब सरकार से अपील की कि अगर खिलाड़ियों को नशे से बचाना है और युवाओं को खेलों से जोड़ना है तो उन्हें अधिक से अधिक हरियाणा के तर्ज पर सुविधाएं प्रदान करेंगे।
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