नशा तस्करों का गढ़ माने जाने वाले लुधियाना में पिछले तीन महीनों में सभी नशा तस्करों ने अपनी वर्किंग बदल दी या फिर पुलिस जान-बूझकर उन्हें गिरफ्तार नहीं कर रही, क्योंकि रिकवरी और तस्करों की गिरफ्तारी में एकदम से गिरावट आ गई। न तो तस्करों ने काम छोड़ा और न ही शहर। फर्क इतना है कि मुलाजिम अपराधियों को पकड़ने में कतराने लगे हैं। लॉकडाउन से पहले और अब में जमीन-आसमान का फर्क आने लगा है।
आंकड़ों की बात करें तो 3 माह में एसटीएफ और लुधियाना कमिश्नरेट ने 17 नशा तस्करों को गिरफ्तारी किया। इसमें से 90 फीसदी मामलों में रिकवरी 65 ग्राम का आंकड़ा नहीं पार कर पाया। वहीं, आरोपियों की गिरफ्तारी में 70 फीसदी आरोपी पुलिस के हत्थे ही नहीं चढ़े। उनका अभी तक कोई अता-पता नहीं। ऐसी स्थिति इसलिए बनी, क्योंकि कोरोना संक्रमित हो रहे मुलाजिम डर के साये में जी रहे हैं और तस्कर धड़ल्ले से धंधा कर रहे हैं।
200 ग्राम से नीचे नहीं आया आंकड़ा : एसटीएफ टीम का रिकॉर्ड रहा है कि लुधियाना में उन्होंने 200 ग्राम से नीचे नशे की कोई बरामदगी नहीं की। इस वजह से उनका विभाग में अलग रूतबा रहा है। तीन महीने पहले तक एटीएम ने लुधियाना से ही पौने दो किलो हेरोइन बरामद की थी, जोकि अब 450 ग्राम से आगे ही नहीं बढ़ी। उन्होंने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसके विपरीत लुधियाना पुलिस ने 300 ग्राम से ज्यादा हेरोइन इन तीन महीनों में नहीं पकड़ी। इसके 70 फीसदी आरोपी फरार होने में कामयाब हो गए। अब वो फरार हुए या पकड़े नहीं गए, क्योंकि पुलिस इस माहौल में रिस्क नहीं ले रही।
हर बार आरोपी फरार : कमिश्नरेट में ओवरऑल पिछले तीन महीनों में पुलिस द्वारा 190 के करीब एफआईआर रजिस्टर की, जिसमें नशा, लूट, फायरिंग और स्नेचिंग के मामले शामिल है। इसमें 70 फीसदी अभी तक मिले नहीं। विभागीय सूत्रों की माने तो कोरोना के टेरर की वजह से पुलिस अपराधियों को नहीं पकड़ रही। इस वजह से रिकवरी और गिरफ्तारियों के रिकॉर्ड में तेजी से गिरावट आ रही है। लोकल पुलिस ने नशे के मामले में अभी तक 220 ग्राम के आसपास हेरोइन रिकवर की है।
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