हिंदू पंचांग के अनुसार 10 दिनों तक चलने वाले श्री गणेशोत्सव पर घर-घर व मंदिरों में स्थापित श्री गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन अनंत चतुदर्शी की तिथी पर किया जाता है। इस दिन मंदीरों, पंडालों व घरों में विराजित गणपति की प्रतिमा को जल में विसर्जित किया जाता है। 10 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में विघ्नहर्ता गणेश की मूर्ति चतुर्थी के दिन स्थापित करते हैं, लेकिन भक्त अपने-अपने हिसाब से 3, 5, 7 या 10 दिनों में गणेश जी की मूर्ति को विसर्जन करते हैं। इसी प्रकार बस्ती टैंकावाली स्थित सनातन धर्म मंदिर के सदस्यों ने प्रधान कैलाश कालिया के नेतृत्व में श्री गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन किया।
इससे पहले मंदिर की भजन मंडली द्वारा कीर्तन किया गया व श्री गणेश जी की सवारी निकाली गई और फिर मोगा रोड़ स्थित सरहिंद फीडर में श्री गणेश जी की प्रतिमा को विसर्जित किया गया। इस अवसर पर राजेश दत्ता, जतिंद्रर वर्मा, हिंद कुमार ठाकुर, अबाद राम, शुभम मेहता, बीएन शर्मा, सुशील कालिया, प्ररेणा मेहता, शबनम रानी, आरती वर्मा, बेबी जेटली, रेखा कालिया आदि उपस्थित रही।
क्यों करते हैं मूर्ति को विसर्जित
सनातन धर्म मंदिर के पुजारी सतीश पांडे ने बताया कि पुराणों के अनुसार महर्षि वेद व्यास ने गणेश चतुर्थी के दिन भगवान श्री गणेश को महाभारत की कथा सुनाना आरंभ किया और लगातार दस दिनों तक महर्षि वेदव्यास आंखे बंद कर भगवान श्री गणेश को कथा सुनाते रहे और श्री गणेश जी बिना आराम किए उसे लिखते रहे। दस दिनों बाद जब महाभारत की कथा पुरी हुई तो वेदव्यास जी ने आंखें खोली तो देखा कि लगातार लिखते - लिखते गणेश जी के शरीर का तापमान काफी बढ़ गया।
तब गणेश जी के तापमान को कम करने के लिए वेदव्यास ने तालाब में स्नान करवाया। जिसके बाद उनके शरीर का तापमान कम हुआ। जिस दिन वेदव्यास ने श्री गणेश जी को स्नान कराया उस दिन अनंत चतुर्थी थी। इसलिए इस दिन श्री गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन किया जाने लगा।
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