माछीवाड़ा के पास गांव के व्यक्ति ने अपने सवा महीने का बच्चा 50 हजार रुपए में गोद दे दिया था। लेकिन बच्चे की मां अपना बच्चा वापस लेने के लिए पुलिस के पास पहुंची तो दूसरा पक्ष ने शहीद भगत सिंह नगर के डिप्टी कमिशनर को शिकायत दी है।
बच्चा गोद लेने वाले पक्ष ने शिकायत देते हुए कहा कि उन्होंने एक बच्चा गोद लिया था। लेकिन अब परिवार मेंबर बच्चा वापस लेने की मांग कर रहे हैं। जिला डिप्टी कमिश्नर ने मामला बाल भलाई कमेटी को सौंपते हुए इसकी जांच करने को कहा है।
बाल भलाई कमेटी के अधिकारी कंचन अरोड़ा ने बताया कि दोनों पक्षों को बुलाया गया है, जिसके बाद बयान दर्ज कर सभी दस्तावेजों की पड़ताल की जाएगी, उसके बाद फैसला होगा कि यह बच्चा जन्म देने वाली मां के पास रहेगा या गोद लेने वाली मां के पास।
दूसरी तरफ माछीवाड़ा पुलिस ने भी बाल भलाई कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद आगे वाली कानूनी कार्यवाही करने की बात कही है। बच्चे को जन्म देने वाली मां और दादी ने कहा कि कुछ महीने पहले गरीबी और पति नशे का आदी होने के कारण उसका बच्चा बेशक उन्होंने गोद दे दिया था, जो हलफिया बयान में जन्म समय के खर्च के तौर पर 50 हजार रुपए देने का दावा किया गया। वह भी पूरे नहीं मिले और जो मिले वह उसका पति नशे में उड़ा गया।
गोद लेने वाले परिवार ने झूठ बोला, न उनके पास जमीन थी, न ही कोठी
बच्चे की दादी ने कहा कि वह अपने जिगर के टुकड़े को किसी भी हालत में नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि वह 50 हजार रुपए लौटाने को तैयार हैं और सरकार व प्रशासन उनको बच्चा वापस दिलाए। बच्चे को जन्म देने वाली मां ने बताया कि घर में गरीबी थी और गोद लेने वाले परिवार ने बताया कि उनके पास एक कोठी और 4 एकड़ जमीन है।
जिस कारण उन्होने सोचा कि यह बच्चा गरीबी में पलने की बजाय किसी बढिय़ा घर पालन-पोषण हो जाएगा। उन्होंने कहा कि बाद में पता लगा कि गोद लेने वाले परिवार ने झूठ बोला, क्योंकि न उनके पास न ही जमीन थी और न ही कोठी है।
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