कोरोना महामारी के बीच डॉक्टर्स और अन्य स्टाफ के बचाव के लिए खरीदी गई पीपीई किटों की क्वालिटी को परखने के लिए जारी जांच प्रक्रिया के तहत शुक्रवार को किटों के सैंपल सील किए गए और उनको आगे सरकारी मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. सुजाता शर्मा को भेज दिया गया है।
कमेटी ने किटों के मामले को लेकर तीनों कंपनियों को बुलाया था, लेकिन उनमें से एक कंपनी नहीं आई। इसी तरह से उन लोगों को भी बुलाया गया था जिन्होंने विगत में किटें डोनेट की थीं।
खैर, सील सैंपल को प्रिंसिपल के ऑफिस भेज दिया गया है, जहां से इसे संभवतया कोयंबटूर स्थित लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा। जांच कमेटी के चेयरमैन डॉ. जेपी अत्री ने बताया कि सभी सैंपल सीलकरके प्रिंसिपल ऑफिस को भेज दिया गया है।
पहनते ही फटनेलगी थी किटें
कोरोना संक्रमित लोगों की इलाज में लगे डॉक्टर, टैक्नीशियन, पैरा-मेडिकल और दर्जा चार आदि के लिए पीपीई किटें खरीदी गई थीं। दरअसल, सासंद गुरजीत सिंह औजला ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को जरूरी सुरक्षा उपकरणों की खरीद के लिए एमपी लैड फंड से एक करोड़ रुपए औरराज्य सभा मेंबर श्वेत मलिक के 25 लाख रुपए दिए थे।
कॉलेज ने तीन कंपनियों से अनुबंध करके 41 लाख रुपए से 6 हजार किटें खरीदी गई। लेकिन जब इनको इस्तेमाल किया गया तो ये पहनते हीफटने लगीं।
600-800 की किट दो हजार में लेने के आरोप
घटिया पीपीई किट्स का विरोध करने वाले आरोप लगाते रहे हैं कि खरीदी गई किटों 600 से 800 रुपए तक की है, जबकि इनको अलग-अलग कंपनियों से उनके मुताबिक तय किए गए रेट के हिसाब से खरीदा गया था।
जैसे कि एक कंपनी की किट 1365 रुपए की, एक कंपनी की किट 2050 रुपए और एक कंपनी की किट की कीमत 1550 रुपए रही है। पीपीई किटों की क्वालिटी को लेकर डॉक्टरों और स्टाफ ने आवाज उठाई।
आखिरकार जिला प्रशासन और सरकार ने इसकी जांच के आदेश दिए थे। विभाग के मंत्री ओपी सोनी ने प्रिंसिपल सुजाता शर्मा को जांच के लिए कमेटी का गठन करने का निर्देश दिया था। इसके बाद डॉक्टरों की टीम का गठन किया गया और उन्होंने इसमें खामियां निकालीं।
इसके बाद फिर एक और कमेटी का गठन किया गया। उसने भी इसमें खामियां पाईं। इसके बाद मामले की जांच पल्लवी चौधरी को सौंपी गई थी। उक्त दोनों कमेटियों की टीम के लोग शुक्रवार को सैंपलिंग के मौके पर मौजूद थे।
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