अपना शहर भला किसे भूलता है। कहीं भी चले जाएं, कहीं भी बसें, कितने ही सफल भी क्यों न हो जाएं, जिस शहर की फिज़ाओं में आप पले-बढ़े, वो भी तो साथ-साथ ही चलता है। यादों में, जज्बातों में। जब भी जिक्र होता है, बातें होती हैं, शहर जीवंत हो उठता है।
रूपलहे पर्दे पर चलने वाली किसी फिल्म की तरह। फिक्की एफएलओ के ऑनलाइन मीट में शुक्रवार यादों के एक ऐसे ही सफर का दिन था। यात्रा पर थीं मशहूर अभिनेत्री दिव्या दत्ता। अपने अलहदा अभिनय के बलबूते 25 सालों से फिल्म इंडस्ट्री में एक अलग धारा सृजित करने वाली इस अदाकारा की लुधियाना से खूबसूरत जज्बाज जुड़े हैं। तो आइये, उनकी यादों के सफर पर हम भी चलें..
बिना गॉडफादर फिल्म इंडस्ट्री में जर्नी आसान न थी, मां ने हर कदम साथ दिया
“सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल, गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स में अंदर जाकर देखना चाहती हूं। फ्रेंड्स से मिलना चाहती हूं। खूबसूरत यादें जुड़ी हुई हैं। मस्ती भरे वो दिन आज भी ताजा हैं। होम टाउन की बात ही निराली होती है, लुधियाना की टिक्की और बर्फ का गोला आज भी मिस करती हूं।
एक्टिंग की दुनिया में आना भी दिलचस्प है। फिल्मी मैगजीन पढ़ती थी। एक टैलेंट हंट का पता चला तो मां को बिन बताए सलवार-सूट में छोटे भाई से फोटोज क्लिक कराए और भेज दिए। कॉन्फिडेंस हाई था, सलेक्शन हो गया। तब मां से अपने शौक के बारे में बताया। कहा- मां तुम्हारा सपोर्ट चाहिए।
डॉक्टर फैमिली से होते हुए भी उन्होंने आगे बढ़ने की हिम्मत दी और मुंबई भेज दिया। आज मां की बदौलत ही मैं अपने सपनों को जी रही हूं। सिंगल पेरेंट होते हुए भी मां ने वो हर खुशी दी। हर कदम साथ दिया। शायद इसलिए उनके दुनिया से जाने का सदमा बर्दाश्त न कर सकी और डिप्रेशन में चली गई।
फिर खुद को संभाला, क्योंकि हारना नहीं था। मुंबई पहुंचना और गॉड फादर के बिना जर्नी आसान न थी। कुछ बनने का मां से वादा किया था। एक जुनून था, ढेरों सपने थे। कुछ करने की भूख थी। इसकी बदौलत फिल्म इंडस्ट्री में चैलेंजिंग रोल निभाए और मैं अपना एक अलग मुकाम बनाने में सफल हो सकी।”
मां पर लिखी किताब ‘मी एंड मां’ शबाना आजमी जी ने फॉरवर्ड लिखे, अमिताभ बच्चन जी ने विमोचन किया। मैं जो चाहती थी, वो हुआ और इस किताब को लोगों का बहुत प्यार मिला।”
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3diiHcF
via
No comments: