पंजाब यूनिवर्सिटी के हॉस्टल नंबर आठ में क्वारेंटाइन किए गए बापूधाम कॉलोनी के करीब 200 लोगों में से तीन के पॉजिटिव आने के बाद हॉस्टल स्टाफ, स्टूडेंट्स और रेजिडेंट्स में पैनिक क्रिएट हुआ है। परेशान इसलिए भी बढ़ गई है कि क्वारेंटाइन किए गए लोग हेल्थ और पुलिस डिपार्टमेंट के स्टाफ की मौजूदगी में सोमवार शाम नीचे के फ्लोर पर आ गए थे।
हॉस्टल में लगाए गए मुलाजिम इस बात को लेकर चिंता में हैं क्योंकि स्टूडेंट्स एड फंड में से नियुक्त किए गए सभी डेली वेजर्स हैं। उन्होंने इस बारे में यूनिवर्सिटी प्रशासन को रिप्रेजेंटेशन भी की है क्योंकि कोरोना के लिए काम करने वाले सफाई कर्मियों और हेल्थ कर्मियों का 50-50 लाख रुपए का बीमा है लेकिन डेलीवेजर्स को कोई सुविधा नहीं मिलती। ऐसे में अगर कोई परेशानी होती है तो उनके परिवार का क्या होगा। प्रशासन ने कहा था कि स्टाफ सिर्फ नीचे के फ्लोर पर काम करे और रिसेप्शन एरिया को भी रस्सियां बांधकर अलग किया गया था लेकिन फिर भी रात को वहां तक भी क्वारेंटाइन किए गए लोग पहुंच गए थे। ऐसे में स्टाफ को इंफेक्शन का खतरा रहेगा। कुछ स्टाफ सेक्टर 25 से भी आता है जिसमें इंफेक्शन फैलने का खतरा हो सकता है। यूनिवर्सिटी के इस हॉस्टल को बहुत लापरवाही के साथ खाली किया गया है। लॉकडाउन का पीरियड होने के कारण स्टूडेंट्स का सामान बेड और अलमारियों में ही सील कर दिया गया है।
रजिस्ट्रार प्रो. करमजीत सिंह का कहना है कि यूनिवर्सिटी से यूटी प्रशासन ने स्टाफ की मदद मांगी थी और ऐसे वक्त में हम उनको इनकार नहीं कर सकते। उन्होंने हमारे स्टाफ को क्वारेंटाइन लोगों से दूर और सेफ रखने का वादा किया है। हालांकि, इस बात का जवाब उनके पास नहीं है कि अधिकारियों ने वादा तो यूनिवर्सिटी के हॉस्टल्स को सबसे आखिर में इस्तेमाल करने का भी किया था। इसी वादे के आधार पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मीडिया और स्टूडेंट्स के लिए बयान भी जारी किया था कि यूनिवर्सिटी के अलावा प्रशासन के पास बहुत कमरे हैं और यह सुविधा सबसे आखिर में इस्तेमाल की जाएगी।
यूनिवर्सिटी प्रशासन को देना होगा हर्जाना
एबीवीपी के प्रेसिडेंट हरीश गुर्जर का कहना है कि जब हम इसका विरोध कर रहे थे तो यूनिवर्सिटी ने कहा था कि पहले इंटरनेशनल हॉस्टल और 10 नंबर हॉस्टल का इस्तेमाल किया जाना है। आठ नंबर हॉस्टल में ज्यादातर सामान निकालने की बजाय सील कर दिया गया है क्योंकि यूनिवर्सिटी प्रशासन भी निश्चिंत था की ये सुविधा सबसे आखिर में इस्तेमाल होगी जिसकी संभावना कम थी। अब अगर स्टूडेंट के किसी सामान को नुकसान होता है तो यूनिवर्सिटी प्रशासन को इसका हर्जाना देना होगा।
वाइस चांसलर इस मामले में करें दखल
नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट निखिल नमरेता ने वीसी प्रो. राजकुमार को मामले में दखल करने के लिए लिखा है। उनका कहना है कि पॉजिटिव मरीजों के कारण आगे यह बीमारी आसपास के एरिया में भी फैल सकती है। प्रस्तावित एकेडमिक कैलेंडर के अनुसार और यूजीसी की सिफारिश के अनुसार एग्जाम जुलाई में होने हैं, ऐसे में यूनिवर्सिटी कम से कम 15 दिन पहले यानी जून में खोलनी होगी। पॉजिटिव मरीजों के इंफेक्शन से उनकी चिंता भी बनी रहेगी।
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हमारे पास इंप्लाॅइज की रिप्रेजेंटेशन आई है और उनकी चिंता जायज भी है। इसको रजिस्ट्रार को फॉरवर्ड कर दिया गया है।-प्रो. इमैनुअल नाहर, डीएसडब्ल्यू, पीयू
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