पंजाब सरकार ने लॉकडाउन के दौरान सूबे में केंद्र की गाइड लाइंस को लागू करने को लेकर मंथन करना शुरू कर दिया है। इसको लेकर सरकार चाहती है कि सूबे के उद्योग और होटल इंडस्ट्री को दोबारा पर पटरी पर लाया जा सकें। इसमें सरकार सूबे के मैरिज पैलेसों, बड़े होटल और रेस्टोरेंट और उद्योगों को लेकर संख्या का फैसला कर रही है। इसमें यह तय किया जाएगा कि अगर सरकार मैरिज पैलेस खोलती है तो उसमें कितने लोगों को आने की परिमशन दी जाए और रेस्टोरेंट में उनकी सीटिंग कैपासिटी के हिसाब से कैसे कदम उठाया जा सकें।
सरकार अभी मैरिज पैलेसों को खोलने से पहले इनको तीन कैटेगरी में बांटेगी। जिसमें सबसे छोटे मेरीिज पैलेसों में 50 उससे बड़े मैरिज पैलेसों में 150 और ज्यादा बड़े पैलेसों में 200 लोगों तक को जाने की इजाजत देने के बारे में विचार दिया जा रहा है। लेकिन यहां पर भी मैरिज पैलेसों में सोशल डिस्टेंस का ध्यान रखना जरूरी होगा। क्योंकि मैरिज पैलेस खुलने से शराब की खपत की भी बढ़ेगी और सरकार सरकार का राजस्व भी बढ़ेगी। इन मैरिज पैलेसों में सोशल डिस्टेंस बनाए रखने के लिए खाने के बड़े काउंटर की जगह अलग-अलग छोटे-छोटे काउंटर रखे जाएंगे।
रेस्टोरेंट को लेकर भी हो रहा है विचार
सरकार सूबे के हाेटलों और रेस्टोंरेंट को खोलने को लेकर भी मंथन कर रही है। क्योंकि लॉकडाउन की वजह से इस इंड्रस्टी को भी काफी नुकसान पहुंच रहा है। इसके लिए भी सरकार रणनीित तैयार कर रही है। जिसमें सरकार होटलों में आधी संख्या में हिसाब से लोगों को बिठाने और रेस्टोरेंट में भी ऐसा ही करने की तैयारी कर रही है। लेकिन इसके लिए होटल और रेस्टोरेंटों को गाइड लाइंस के मुतािबक होटल और सीटिंग एरिया को सेनेटाइज करना होगा। इनके खुलने से काफी संख्या में लोगों को रोजगार मिलेगा साथ सरकार को राजस्व भी आने लगेगा।
छोटे उद्योगों को लेकर भी लेगी सरकार फैसला
सूबे में छोटे उद्योगों को लेकर भी सरकार अपने नियमों में कुछ छूट देने की तैयारी कर रही है। जिसमें लेबर को रखने को लेकर कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने पर भी विचाार चल रहा है। सरकारी चाहती है कि इनमें कर्मचारियों की संख्या बढ़ने के बाद माल का उत्पादन भी ज्यादा होगा। क्योंकि माल का उत्पाइन तभी ज्यादा हो सकता है जब फैक्टरी में लेबर की संख्या पूरी हो। इससे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। उद्योगपति भी कह रहे है कि उनके पास आर्डर तो आ रहे है लेकिन लेबर की कमी है। सरकार एरिया मुताबिक लेबर बढ़ाने की इजाजत दी जाए।
सरकार करे नुकसान की भरपाई : ट्रांसपोर्ट्स
विभिन्न कारोबारियों और व्यापारियों के बाद सूबे के ट्रांसपोर्ट्स ने भी सरकार से मांग की है कि लॉकडाउन में बसें न चलने से जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई सरकार करें और टैक्स रियायत दें, क्योंकि बेशक लॉकडाउन में बसें नहीं चलीं, लेकिन हमें बसों की किस्तें, ड्राइवर्स-कंडक्टर्स की तनख्वाह और बसों की मेंटेंनेस पर पैसा खर्चना पड़ा है। इससे काफी नुकसान हुआ है। इसलिए सरकार हमें टैक्स रियायत देते हुए नुकसान की भरपाई कर सके ताकि पहले से सूबे में घाटे में चल रहा ट्रांसपोर्ट का कारोबार पुन: सही ढंग से जीवंत हो सके।
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