प्रदेश के एसोसिएट स्कूलों का संचालन जारी रखने के लिए शिक्षा विभाग ने एक बार फिर से इमारत व कमरों की स्पेसिफिकेशन की शर्त लगा दी है, जिससे प्रदेश के 2107 एसोसिएट स्कूलों की तालाबंदी होने के आसार बन गए हैं, इन स्कूलों पर निर्भर 35 हजार टीचिंग-नान टीचिंग स्टाफ बेरोजगार हो जाएगा, वहीं 4 लाख बच्चों का भविष्य भी दांव पर लगेगा।
निर्धारित नार्म्स पूरा नहीं कर पाने वाले स्कूलों को 31 मार्च से बंद करने की चेतावनी दी गई है। 6 महीने से कांटीन्यूशन फीस व प्रोफार्मा का इंतजार कर रहे एसोसिएट स्कूलों पर शिक्षा विभाग ने वही शर्त थोप दीं जो 9 साल पहले 2011 में लगाईं थी, पूरा न करने वाले स्कूलों को एसोसिएट का दर्जा दिया था और हर साल निर्धारित फीस भरकर इन स्कूलों को कांटीन्यू किया जा रहा है।
शिक्षा विभाग ने प्रदेश के एसोसिएट स्कूलों को एकेडमिक सेशन 2020-21 के कांटीन्यूशन फीस-प्रोफार्मा भरने के लिए 30 जून तक का वक्त दिया है। इस अवधि में स्कूलों के लिए निर्धारित शर्त पूरा करना नामुमकिन है।
स्कूल के मैट्रिक श्रेणी तक 500 वर्ग गज जबकि सीनियर सेकंडरी तक 750 वर्ग गज अथवा 1.19 वर्ग गज कारपेट क्षेत्र प्रति विद्यार्थी जगह होना लाजिमी है। कमरों का साइज 20x15 फुट की शर्त लगाई है।
अधिकांश स्कूल शहर के घनी आबादी में स्थित हैं जोकि 200 से 300 वर्ग गज क्षेत्रफल है जिसका दायरा बढ़ाने के लिए आसपास की जगह खरीदना संभव नहीं। वहीं कमरों का साइज भी बढ़ाने की तोड़फोड़ में स्कूलों का नवीनीकरण ही करना होगा जोकि लॉकडाउन के तंगहाल हालात में किसी स्कूल प्रबंधक के बस में नहीं।
6 माह के इंतजार के बाद कांटीन्यूशन की बंधी उम्मीद
गली-मोहल्लों व कॉलोनियों में चलने वाले स्कूलों को निर्धारित शर्तें पूरा न करने की सूरत में 2011 में तत्कालीन शिक्षामंत्री सेवा सिंह सेखवां ने इन्हें एसोसिएट स्कूल का दर्जा देकर हर साल फीस भरवाकर कांटीन्यूशन का प्रावधान किया।
अक्सर नवंबर-दिसंबर में एसोसिएट स्कूलों के लिए कांटीन्यूशन प्रोफार्मा व फीस भरवाया जाता है। अब शिक्षा बोर्ड की ओर से जारी सरकुलर के अनुसार 30 जून तक 10 हजार कांटीन्यूशन फीस जबकि 15 जुलाई तक दो हजार रुपए जुर्माने समेत 12 हजार रुपए, 31 जुलाई तक 15 हजार रुपए तथा 17 अगस्त तक जुर्माना समेत 20 हजार रुपए कांटीन्यूशन फीस भरनी होगी।
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