कोरोना ने सभी को एक सबक दे दिया है कि दवा पर भरोसा न करें। इम्युनिटी को इतना स्ट्रांग करें कि कोई बीमारी आपको जकड़ न पाए। लोग हैंडमेड और होममेड पर विश्वास कर रहे हैं।
इसी हैंडमेड चीजों में मुरब्बा ऐसी मिठाई है जो कि स्वाद के साथ-साथ सेहत भी भरपूर देती है। हैंडमेड और केमिकल फ्री मार्केट का सालाना 100 करोड़ का कारोबार है, जिसका नाम है मिश्री बाजार।
जिस पर कोरोना का कम असर हुआहै, क्योंकि फरवरी में सीजन का सारा माल दुकानों पर चला जाता है और लॉकडाउन खुलते ही रिटेल सामान लेने वालों ने इस बाजार का रुख किया। आंवले के मुरब्बे की सबसे ज्यादा डिमांड पहले भी थी और कोरोना के बाद बढ़ गई है।
मिश्री बाजार में पिछले 70 साल से दुकान चला रहे जवाहर लाल एंड संस के जवाहर लाल ने बताया कि उनके परदादा, दादा, पिता और अब वह इस दुकान को संभाल रहे हैं। वह मुरब्बे, मिश्री और अन्य चीजों की मेनुफेक्चरिंग भी करते हैं और उनके पास तकरीबन 15 से 20 लोग काम करते हैं।
कोरोना कॉल के दौरान उन्होंने पूरी सेफ्टी के साथ मेनुफेक्चरिंग की है। हर रोज लेबर की स्क्रीनिंग की जाती है और सोशल डिस्टेंस का पूरा ध्यान रखा जाता है। मार्केट में करीब 30 दुकानें हैं और सालाना 100 करोड़ का कारोबार है।
ट्रेडिशनल आचार, मुरब्बा, शर्बत के अलावा कई अन्य चीजें भी जुड़ गई हैं, जिसमें कैंडी, ड्राई मुरब्बा, हर फ्लेवर के शर्बत, अाचार, गूंद कतीरा शामिल हैं। एचएस ट्रेडर्स के रवनीत सिंह के मुताबिक मिश्री बाजार 16वीं सदी में बना था और तब से आज तक कई बदलाव किए गए हैं।
मगर सामान की क्वालिटी पर कोई समझौता नहीं किया गया। पहले मुरब्बा लूज बिकता था, लेकिन अब पैकेजिंग पर खास ध्यान दिया जाता है। कई तरह के जूस मिलते हैं। अगर छोटी फैक्टरी है तो 5 से 10 लोगों को काम मिल जाता है।
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